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Wednesday, April 29, 2026
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UPSC एग्‍जाम के क्रेज में बच्‍चे बर्बाद कर रहे समय… दिग्‍गज इकनॉमिस्‍ट ने क्‍यों कही यह बात?

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नई दिल्‍ली

जाने-माने इकनॉमिस्‍ट और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्‍याल ने UPSC एग्‍जाम के क्रेज पर बड़ी बात कह दी है। उनके मुताबिक, ज्‍यादातर युवा सिविल सर्विसेज को डिफॉल्‍ट करियर ऑप्‍शन की तरह देखते हैं। दूसरे कई करियर ऑप्‍शन के बारे में विचार किए बगैर बहुत सारे युवा इसमें समय और प्रयास बर्बाद करते हैं। उन्‍होंने यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) परीक्षाओं को लेकर इस तरह के क्रेज पर चिंता जाहिर की है। उनका मानना है कि ये परीक्षाएं सिविल सर्वेंट्स के चयन के लिए जरूर महत्वपूर्ण हैं। लेकिन, कई युवा वैकल्पिक रास्तों पर विचार किए बिना इनमें समय और प्रयास लगाते हैं।

एक पॉडकास्ट में सान्याल ने इस बारे में चर्चा की है। उन्होंने बताया कि दशकों से पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे क्षेत्रों में लोगों की आकांक्षाएं सीमित थीं। वे सिर्फ बुद्धिजीवी, नेता या स्थानीय राजनेता जैसी भूमिकाओं तक के बारे में सोचते थे। यह सिमटी हुई सोच अक्सर लोगों को अलग-अलग तरह के अवसरों के बजाय डिफॉल्‍ट विकल्प के रूप में सिविल सेवाओं में करियर बनाने की ओर ले जाती है। सान्याल के मुताबिक, यूपीएससी एग्‍जाम देने के बारे में केवल उन लोगों को सोचना चाहिए जो वाकई में एडमिनिस्‍ट्रेटर बनने में दिलचस्‍पी रखते हैं।

युवाओं को सही द‍िशा में बढ़ने की जरूरत
सान्याल ने कहा कि उन्‍हें लगता है कि अब आकांक्षाएं बदल रही हैं। हालांकि, अब भी बहुत से युवा यूपीएससी को पास करने की कोशिश में अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। सान्‍याल यह भी बोले कि वह ऐसा बिल्‍कुल नहीं कह रहे हैं कि लोग परीक्षा न दें।उन्‍होंने कहा, ‘हर देश को ब्‍यूरोक्रेसी की जरूरत है। यह बिल्कुल ठीक है। लेकिन, मुझे लगता है कि लाखों लोग एक परीक्षा पास करने की कोशिश में अपने बेहतरीन साल निकाले दे रहे हैं। जबकि वास्तव में वहां कुछ हजार लोगों की छोटी संख्या की ही जरूरत है।’

सान्याल बोले कि अगर वे वही ऊर्जा कुछ और करने में लगाते हैं तो हम ज्‍यादा ओलिंपिक गोल्‍ड मेडल जीतेंगे। बेहतर फिल्में बनते देखेंगे। बेहतर डॉक्टर देखेंगे। ज्‍यादा उद्यमी और वैज्ञानिक सामने आएंगे।

सान्‍याल ने युवाओं से क्‍या की है अपील?
सान्याल ने युवा भारतीयों से अपील की कि उन्‍हें अन्य क्षेत्रों में अपने जुनून और संभावित योगदान के बारे में विचार करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि जोखिम लेने और उद्यमिता के प्रति सामाजिक नजरिये को बदलने की जरूरत है। इकनॉमिस्‍ट ने मध्यवर्गीय लोगों की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव दिखने की बात कही जिसमें ज्‍यादा लोग जोखिम लेने और वेंचर शुरू करने के इच्छुक हैं।

उन्‍होंने कहा कि मध्यम वर्ग की सोच में बदलाव देखने को मिला है। लोग जोखिम उठा रहे हैं। यह दिमाग का खुलापन है, जो सिर्फ उद्यमिता के छोटे से क्षेत्र में नहीं हो रहा है। यह नजरिये में बदलाव है। नजरिये में यह बदलाव हर चीज में दिखेगा। साइंस, म्‍यूजिक से लेकर लिट्रेचर तक यह दिखाई देगा। इसके कारण हर तरह के इनोवेशन होंगे।

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