नई दिल्ली
दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय की तरफ से प्राइवेट स्कूलों की फीस बढ़ोतरी को लेकर नया आदेश आया है। निदेशालय की तरफ से जारी लेटर साफ कहा गया है कि प्राइवेट स्कूल बिना पूर्व अनुमति के फीस बढ़ोतरी नहीं कर सकते हैं। लेटर में लिखा है कि सरकारी एजेंसियों की तरफ से जमीन हासिल करने वाले प्राइवेट, बिना सहायता प्राप्त स्कूल शिक्षा निदेशालय की पूर्व अनुमति लिए बिना फीस नहीं बढ़ा सकते हैं। लेटर में डीएसईआर, 1917 के सेक्शन 17 का जिक्र किया गया है।
फीस बढ़ोतरी के लिए भेजना होगा प्रस्ताव
डिप्टी डायरेक्ट एजुकेशन की तरफ से भेजे गए लेटर में लिखा गया है कि सभी प्राइवेट मान्यता प्राप्त स्कूल के हेड/स्कूल मैनेजर्स जिन्हें सरकारी एजेंसियों की तरफ से भूमि आवंटित की गई है, को यदि फीस में बढ़ोतरी करनी है तो इसके लिए प्रपोजल भेजना होगा। इसके लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। इसका मतलब है कि नए सत्र में 2024-25 में फीस बढ़ोतरी के लिए 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन करना होगा। लेटर में साफ लिखा गया है कि अपूर्ण प्रस्ताव को खारिज कर दिया जाएगा।
शिकायत मिली तो होगी कार्रवाई
शिक्षा निदेशालय ने साफ किया है कि स्कूलों की तरफ से भेजे प्रस्तावों की जांच निदेशक की तरफ से अधिकृत किसी अधिकारी या टीमों के माध्यम से की जाएगी। यदि स्कूल की तरफ से इस आदेश के संदर्भ में कोई प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो स्कूल ट्यूशन फीस/शुल्क में वृद्धि नहीं करेगा। इसमें कहा गया है कि ऐसे स्कूलों को सख्त निर्देश दिया जाता है कि जब तक शिक्षा निदेशक उनके प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दे देते, तब तक वे कोई फीस न बढ़ाएं। ऐसी पूर्वानुमति के बिना किसी भी शुल्क में वृद्धि के संबंध में किसी भी शिकायत के मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही वैधानिक प्रावधानों के अनुसार स्कूल अपने खिलाफ कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होगा।
