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Wednesday, April 29, 2026
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व्हील चेयर पर संजय सिंह, रिहाई से पहले अस्पताल से तिहाड़ जेल किए शिफ्ट AAP सांसद

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नई दिल्ली,

आम आदमी पार्टी के लिए आज का दिन बेहद अहम हैं. 181 दिन बाद आज तिहाड़ से संजय़ सिंह जेल से बाहर निकलेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ही उन्हें कथित शराब घोटाला मामले में जमानत दी थी. लीवर संबंधी शिकायत के बाद संजय सिंह को मंगलवार को ही आईएलबीएस अस्पताल में भर्ती कराया गया था.इलाज पूरा होने के बाद आज उन्हें डिस्चार्ज किया गया. जब उन्हें अस्पताल से तिहाड़ के लिए ले जाया जा रहा था तो वह व्हील चेयर पर बैठे नजर आए. इस दौरान उनके साथ में अस्पताल के कुछ लोग और सुरक्षाकर्मी थे.

इससे पहले मंगलवार को कोर्ट के आदेश के बाद बुधवार को संजय सिंह की तिहाड़ जेल से रिहाई का प्रोसेस शुरू हुआ. ट्रायल कोर्ट (राउज एवेन्यू कोर्ट) में जमातन की शर्तें तय की. इसके बाद संजय सिंह की पत्नी ने 2 लाख रुपए का जमानत बॉन्ड भरा और फिर कोर्ट का आदेश तैयार हुआ जहां से इसे तिहाड़ जेल भेजा गया. अब कभी भी संजय सिंह की तिहाड़ से रिहाई हो सकती है.

बेटी बोलीं- उम्मीद है सभी को मिलेगी जमानत
संजय सिंह की रिहाई पर उनकी बेटी इशिता सिंह जो एक अभिनेत्री हैं, ने आजतक से बात करते हुए कहा कि यह बहुत अच्छा दिन है, एक बार कागजी कार्रवाई पूरी हो जाने पर वह बाहर आ जाएंगे.इशिता भी अस्पताल में अपने पिता के साथ मौजूद थीं. इशिता ने कहा, ‘इस वक़्त ने बहुत हिम्मत दी है – वो सारी चीज़ याद आ रही हैं. बस सत्य की जीत हुई है. पूरा भरोसा है कि जो अन्य मामले हैं उनमें भी जमानत मिलेगी. हम उन सभी लोगों के लिए जमानत चाहते हैं जिन्हें गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया है.’

जमानत के साथ हिदायत
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संजय सिंह को जमानत देते समय ने साफ कर दिया था कि इस बेल को नजीर की तरह ना समझा जाए. ये वाक्य लिखने का सीधा और साफ मतलब यही है कि इस आदेश के आधार पर दूसरा आरोपी ऐसी ही राहत का दावा नहीं कर सकता. संजय सिंह के वकील ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि वो इस केस में अपनी भूमिका को लेकर जमानत पर रहने के दौरान कोई टिप्पणी नहीं करेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसका अनिवार्य रूप से मतलब यह होगा कि इस मामले के अन्य आरोपियों को इससे राहत नहीं मिलने वाली है. कोर्ट के आदेश के आधार पर ईडी किसी भी तरह से अन्य आरोपियों को समान रियायत देने के लिए बाध्य नहीं होगी. अन्य अदालतें भी इस आदेश से आरोपियों को राहत देने के लिए बाध्य नहीं होंगी. सुप्रीम कोर्ट की इस अहम टिप्पणी ने कहीं न कहीं आम आदमी पार्टी की टेंशन बढ़ा दी है.

 

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