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Wednesday, April 29, 2026
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क्या युवाओं में घट रही है वोटिंग की दिलचस्पी? 40% से भी कम ने बनवाई वोटर आईडी

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नई दिल्ली

दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन सबसे कम उम्र के मतदाता यानी 18 और 19 साल के युवा अपना वोट डालने के लिए अनिच्छुक लग रहे हैं। 2024 में देशभर के कुल युवाओं में से 40 फीसदी से कम ने मतदान के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। भारत में सबसे कम उम्र के मतदाता, जिनकी उम्र 18 या 19 साल है, वो आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। इसमें बिहार, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में रजिस्ट्रेशन की दर और भी कम है। चुनाव आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि इस आयु वर्ग में अनुमानित 4.9 करोड़ नए वोटर्स हैं, इनमें से केवल 38 फीसदी ही रजिस्टर्ड हैं।

18-19 के युवा वोटरों में दिख रहा कम उत्साह
लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के करीब एक पखवाड़े बाद इलेक्शन कमिशन ने आंकड़े जारी किए हैं। इनमें 18 और 19 वर्ष के लगभग 1.8 करोड़ से कुछ ज्यादा ही नए मतदाता वोटिंग लिस्ट से जुड़े हैं। इस आयु वर्ग की अनुमानित जनसंख्या 4.9 करोड़ से कम है। इसका अर्थ है कि पहली बार मतदान करने वाले वोटरों में से करीब 38 फीसदी ही मतदाता सूची में रजिस्टर्ड हैं। तेलंगाना इस लिस्ट में टॉप पर है। राज्य में 18-19 आयु वर्ग में 8 लाख (66.7%) से अधिक वोटर्स रजिस्टर्ड हैं। इस सूची में बिहार सबसे नीचे है, जहां संभावित 54 लाख में से केवल 9.3 लाख (17%) वोटर्स ही रजिस्टर्ड हैं।

विडंबना यह है कि जिन लोगों की भविष्य में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है, उन्होंने ही उस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए सबसे कम इंटरेस्ट दिखाया जो उनके फ्यूचर को आकार देने में बेहद अहम है। बेशक, यह संख्या थोड़ी बढ़ सकती है क्योंकि चुनाव आयोग, राजनीतिक दल और विभिन्न सिविल सोसायटी ग्रुप्स यह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहे कि हर वोटर अपना रजिस्ट्रेशन कराएं, लेकिन वे ये आंकड़ा कितना आगे बढ़ा सकते हैं देखना होगा?

तेलंगाना में युवा वोटरों की अच्छी संख्या
सबसे कम उम्र के आयु वर्ग को शामिल करने में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य तेलंगाना है, जो भारत का सबसे नया राज्य है। इस राज्य में 8 लाख से अधिक 18 और 19 वर्ष के मतदाता मतदाता सूची में हैं, जो इस आयु वर्ग के लिए अनुमानित 12 लाख की जनसंख्या का लगभग दो-तिहाई या 66.7 फीसदी है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल दो अन्य राज्य हैं जो 60 फीसदी या उससे अधिक युवा वोटर्स के रजिस्ट्रेशन में सफल रहे हैं।

यूपी-बिहार का हाल भी जान लीजिए
दूसरी ओर, देश की सबसे कम उम्र की आबादी के रजिस्ट्रेशन वाला राज्य बिहार है, जहां संभावित 54 लाख में से केवल 9.3 लाख (17%) युवा मतदाता हैं। दिल्ली की बात करें तो यहां 7.2 लाख युवाओं में से केवल 1.5 लाख मतदाता रजिस्टर्ड हैं, जो हर पांच में से एक यानी 21 फीसदी से थोड़ा अधिक है। यूपी में 23 फीसदी और महाराष्ट्र में 27 फीसदी युवाओं ने रजिस्ट्रेशन के साथ खास बेहतर प्रदर्शन नहीं किया है। विडंबना यह है कि राजनीतिक दलों की ओर से युवाओं को भारत के भविष्य और चुनावी नतीजों के लिए महत्वपूर्ण बताने के बाद भी यह संख्या इतनी कम है।

आंकड़ों का यह भी मतलब है कि लोकसभा सीटों के मामले में पांच सबसे बड़े राज्यों में से तीन – यूपी, महाराष्ट्र और बिहार में 18 और 19 वर्ष के एक चौथाई या उससे कम वोटर मतदान के लिए रजिस्टर हैं। इनके अलावा दो और राज्य पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु हैं। यहां आधे से भी कम मतदाताओं ने वोटिंग लिस्ट में जगह बनाई है।

हमें ये संख्या कैसे मिलीं?
हमने जनगणना कार्यालय की ओर से मार्च 2021 और मार्च 2026 के लिए की गई एज ग्रुप वाइज जनसंख्या अनुमानों को देखा। इसके साथ ही उनसे हर प्रमुख राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और पूरे भारत के लिए मार्च 2024 के लिए एक आंकड़ा प्राप्त किया। चूंकि ये अनुमान हैं, इसलिए इनके वास्तविक संख्या से थोड़ा अलग होने की संभावना है, जिसे हम नहीं जानते क्योंकि जनगणना 2021 अभी होनी बाकी है। हालांकि, ये अनुमान वास्तविक संख्या से बहुत अधिक दूर नहीं होंगे।

क्या बोले पूर्व इलेक्शन कमिश्नर एसवाई कुरैशी
पूर्व चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी, जिन्होंने 2010 में ईसी में मतदाता जागरूकता और शिक्षा विभाग शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि इस तरह के कम नामांकन के बारे में जानकर उन्हें दुख हुआ। मतदाता उदासीनता हमेशा एक मुद्दा रही है, लेकिन हम एक निरंतर अभियान के साथ इसे दूर करने में सक्षम थे। ऐसा लगता है कि कुछ गड़बड़ है। यह चिंता का विषय है कि प्रयास या तो धीमे हो गए हैं या अप्रभावी रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा वोटरों के रजिस्ट्रेशन में गिरावट की कई वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं। उनकी उदासीनता में वोटर रजिस्ट्रेशन को लेकर होने वाली कागजी कार्रवाई मुख्य कारण हो सकती है।

वोटिंग से कैसे जुड़ें नए मतदाता
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर अनिल वर्मा ने कहा कि अनौपचारिक चर्चाओं से चुनावी प्रक्रिया के बारे में कई तरह की बातों का पता चलता है। युवाओं में मतदान के प्रति ‘उदासीनता’ को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसी भावना इसलिए भी आ सकती है क्योंकि प्रमुख दलों का नेतृत्व वरिष्ठ नेता करते रहे हैं। पर्याप्त युवा नेता या उम्मीदवार नहीं होते जिनसे युवा जुड़ सकें।

‘वोटर कार्ड के लिए पूरे साल हो नामांकन’
बिहार में कम युवा मतदाताओं की संख्या के बारे में पूछे जाने पर, मतदाता जागरूकता पर काम करने वाले एनजीओ एक्शन फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (एएजी) के राजीव कुमार ने कहा कि नामांकन पूरे साल जारी रहना चाहिए, न कि मतदान से कुछ महीने पहले। बिहार में राजनीतिक जागरूकता अधिक है लेकिन इसका मतलब अधिक नामांकन नहीं है। राजीव कुमार ने कहा कि आबादी का एक बड़ा वर्ग है – छात्र और प्रवासी मजदूर, जो पलायन करते हैं और केवल त्योहारों या छुट्टियों के दौरान घर आते हैं। उनका नामांकन तब किया जाना चाहिए जब वे शहर में हों।

लोकसभा चुनाव तक क्या बढ़ेगा युवा वोटर्स का आंकड़ा
महाराष्ट्र के स्कूलों और कॉलेजों में नागरिक अधिकारों और शासन के मुद्दों पर कार्यशाला आयोजित करने वाले मार्क माई प्रेजेंस के चैतन्य प्रभु युवाओं की इस उदासीनता से असहमत हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक प्रक्रिया और शासन के मुद्दों की जानकारी की कमी चुनौतियां पैदा करती है। उन्होंने कहा कि पूरे स्कूल और कॉलेज में, छात्र इस धारणा के साथ रहते हैं कि राजनीति एक बुरा शब्द है। आप अचानक उनसे 18 साल की उम्र में बदलने और चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने की उम्मीद नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि सीबीएसई को छोड़कर, चुनाव और राजनीति की मूल बातें स्कूलों में पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में भी नहीं पढ़ाई जाती हैं। प्रभु ने कहा कि मार्क माई प्रेजेंस ने इस साल मुंबई में अपने प्रयासों के माध्यम से 41,000 नए मतदाताओं का नॉमिनेशन किया है।

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