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अमेरिका चाहता था भारत खरीदे रूस से तेल… ये क्या बोले अमेरिकी राजदूत, खुली पोल

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वॉशिंगटन

यूक्रेन युद्ध के बाद से ही पश्चिमी देशों ने रूस पर भारी प्रतिबंध लगा दिए थे। रूस को स्विफ्ट पेमेंट सिस्टम से अमेरिका ने बाहर कर दिया था। इतना ही नहीं उससे कोई तेल न खरीद सके इसकी भी पूरी कोशिश अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी देश करते रहे। लेकिन भारत ने फिर भी रूस से तेल खरीदा। अब भारत में अमेरिकी राजदूत एक अजीबोगरीब दावा कर रहे हैं। एरिक गार्सेटी ने कहा है कि भारत ने रूसी तेल खरीदा क्योंकि हम चाहते थे कि कोई रूसी तेल खरीदे। हम नहीं चाहते थे कि तेल का भाव बढ़े। हालांकि उनके इस बयान पर विश्वास करना मुश्किल है। माना जा रहा है कि भारत अमेरिका के दबाव में नहीं आया, जिस कारण अब गार्सेटी इस तरह के बयान से अपने देश की छवि बनाने में लगे हैं।

यूक्रेन युद्ध के बाद से ही पश्चिमी देश भारत पर दबाव बनाते रहे हैं कि वह रूस से कच्चा तेल न खरीदे। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर पश्चिमी देशों की जब भी यात्रा पर गए हैं तो रूसी तेल को खरीदने का मुद्दा उठाया जाता रहा है। हमेशा भारत को एक नैतिक दबाव में लाने की कोशिश पश्चिमी देश करते रहे हैं। अब अमेरिकी राजदूत का यह कहना कि अमेरिका चाहता था कि भारत रूस से तेल खरीदे वह किसी ‘झूठ’ से कम नहीं लगता। डॉ. जयशंकर खुद कहते रहे हैं कि भारत पर लगातार रूस से तेल न खरीदने का दबाव था।

20 रुपए महंगा मिलता पेट्रोल
डॉ. जयशंकर ने हाल ही में एक बयान में कहा, ‘हम पर दबाव था कि रूस से तेल न लें। मान लीजिए कि हम झुक जाते और रूस से तेल नहीं लेते। तो आप बताइए कि पेट्रोल की कीमत कितनी बढ़ती। कम से कम 20 रुपए ज्यादा एक लीटर पर महंगा होता।’ इतना ही नहीं फरवरी में म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में एक पैनल डिस्कसन के दौरान भी डॉ. जयशंकर से यह सवाल पूछा गया था। उस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन भी मंच पर थे। सवाल उठता है कि अगर अमेरिका की यह नीति थी तो आखिर ब्लिंकन ने गार्सेटी जैसा बयान क्यों नहीं दिया था।

डॉ. जयशंकर की बातों को दोहरा रहे गार्सेटी
एरिक गार्सेटी अपने बयानों में यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिका नहीं चाहता था कि दुनिया में तेल का भाव बढ़े। हालांकि आज गार्सेटी जिन बातों को कह रहे हैं, वह डॉक्टर जयशंकर बहुत पहले से दोहराते रहे हैं। डॉ. जयशंकर ने कहा था कि वह अपने पश्चिमी सहयोगियों को समझाते हैं कि अगर उन्होंने रूस से तेल नहीं खरीदा तो इंटरनेशनल मार्केट में इसका भाव बढ़ेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में भारत का रूसी तेल आयात नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। क्योंकि यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूसी रिफाइनिंग क्षमता आंशिक रूप से प्रभावित हुई है, जिसके कारण रूस को तेल के निर्यात पर जोर देना पड़ा है।

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