इस्लामाबाद:
भारत में लोकसभा चुनाव 2024 के लिए प्रचार चल रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। इस बीच उन्होंने पाकिस्तान को लेकर एक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अब वह पाकिस्तान के बारे में चिंता नहीं करते। भारत को अपने लक्ष्यों पर आगे बढ़ना चाहिए। उनके इस बयान के बाद अब एक्सपर्ट कह रहे हैं कि पीएम मोदी 2015 में लाहौर गए थे। जो पाकिस्तान के लिए ठीक उसी तरह था, जैसे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने 1972 में चीन की यात्रा की थी। चीन अमेरिका के संबंध ठीक हुए, लेकिन पाकिस्तान ने यह मौका गंवा दिया। इसके अलावा एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को पाकिस्तान से हटकर चीन पर ध्यान देना चाहिए, जो उसकी असली चिंता है।
एक प्राइवेट न्यूज चैनल के साथ इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा, ‘हमें पाकिस्तान के अप्रोच में अपना दिमाग खपाना नहीं चाहिए। हमें अपना लक्ष्य लेकर आगे बढ़ते रहना चाहिए। उन्होंने अपना देश 1947 में ले लिया हमसे, वो अपना करें, भला करें अच्छा करें। वो अपना दो टाइम की रोटी खा लें बस। मुझे उसमें अपना समय गंवाने की जरूरत नहीं है। हम बहुत आगे निकल चुके हैं और हमें अपना विकास उन्हें देख कर करना चाहिए। हम अपना टाइम खराब कर रहे हैं। मुझे तो अपनी देश की नई पीढ़ी का भविष्य देखना है।’
पाकिस्तान ने गंवाया मौका
विल्सन सेंटर में दक्षिण एशिया संस्थान के निदेशक माइकल कुगेलमैन ने पीएम मोदी के इस बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘पीएम मोदी की हाल में पाकिस्तान को लेकर की गई टिप्पणियां आश्चर्यजनक नहीं हैं। 2015 में उनकी लाहौर की औचक यात्रा के बाद आतंकी हमलों के बाद से उन्होंने पाकिस्तान पर लगातार सख्त रुख अपनाया है, लेकिन बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं है। लाहौर उनके निक्सन-टू-चाइना जैसा क्षण था। लेकिन कुछ भी नहीं हुआ।’
भारत की असली चिंता चीन
उन्होंने कहा, ‘2015-16 के सबक को देखते हुए, बातचीत का जोखिम बहुत ज्यादा है। निसंदेह इसे लेकर सख्त रुख अपनाने की वैचारिक प्रेरणा भी है। साथ ही पाकिस्तान से रिश्ते बनाने के लिए कोई आर्थिक प्रोत्साहन भी नहीं है। यही कारण है कि भारत के साथ व्यापार फिर से खोलने की पाकिस्तान की आशा एक मूर्खतापूर्ण कार्य है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मेरा मानना है कि भारत पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने में दिलचस्पी नहीं रखता, लेकिन वह यह भी नहीं चाहता कि रिश्ते खराब हों। भारत की मुख्य चिंता चीन है न कि पाकिस्तान। भारत पाकिस्तान से तनाव नहीं चाहता ताकि चीन की चुनौतियों पर ज्यादा ध्यान दे सके।’
