जयपुर
राजस्थान के लोकसभा चुनाव में बांसवाड़ा सीट से जीते बाप के नवनिर्वाचित सांसद राजकुमार रोत को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। आखिर राजकुमार रोत किसके पाले में है? यह अभी तक किसी को समझ नहीं आया। इंडिया गठबंधन से मिलकर चुनाव जीत कर राजकुमार रोत अब स्वतंत्र रहने की बात कह चुके हैं। उनके इस बयान से सियासी हलकों में हलचल मची हुई हैं। मंगलवार को राजकुमार रोत ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से मिलकर उन्हें इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत ने अपने नए कदम से प्रदेश की सियासत में नई हलचल मचा दी है। उन्होंने आज सभी को हैरान करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात की। जिसके बाद सियासी गलियारों में नए कयास शुरू कर दिए हैं। इसको लेकर राजनीतिक जानकार अपने-अपने मायने निकाल रहे हैं। एक तरफ राजकुमार रोत कांग्रेस के नेताओं से भी मुलाकात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी के नेताओं से उनकी मुलाकातें भी सियासत को हैरान कर रही हैं कि आखिर राजकुमार रोत के मन में क्या खिचड़ी पक रही है?
स्वतंत्र रहने की बात कहकर राजकुमार रोत मिले मुख्यमंत्री से!
राजकुमार रोत ने इंडिया गठबंधन से मिलकर बांसवाड़ा लोकसभा चुनाव लड़ा। जहां उन्होंने महेंद्रजीत सिंह मालवीय जैसे बड़े दिग्गज नेता को 2 लाख 47 हजार वोटों के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी। इस दौरान उनकी जीत से राजस्थान की सियासत भी काफी हैरान हैं। हालांकि जीत के बाद अब राजकुमार रोत के सुर बदल चुके हैं। उन्होंने इंडिया गठबंधन के साथ जुड़ने की अपेक्षा स्वतंत्र रहने की बात कही है। इस बीच राजकुमार रोत की हैरान भारी पॉलिटिक्स नजर आई। जिसमें राजकुमार रोत ने मंगलवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात की। हालांकि, उनकी मुलाकात के पीछे क्या कारण रहे? यह अभी तक सामने नहीं आए हैं, लेकिन इस मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक पंडित इस मुलाकात को जोड़कर अपनी अपनी समीकरण बताने लगे हैं।
कांग्रेस से भी मुलाकात फिर बीजेपी से भी, आखिर क्या चल रहा है?
चुनाव जीतने के बाद राजकुमार रोत ने मीडिया में कहा कि वह किसी भी हाल में एनडीए गठबंधन में नहीं जाएंगे, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी भी गठबंधन के साथ नहीं है रहकर स्वतंत्र रूप से कार्य करेंगे। उनका यह बयान सियासत में सस्पेंस पैदा कर रहा है। चर्चा है कि आखिर राजकुमार के मन में क्या सियासी खिचड़ी पक रही? उन्होंने इंडिया गठबंधन की बैठक में नहीं बुलाने पर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बांसवाड़ा और बागीदौरा में गठबंधन अधूरा रहा हैं। इस बीच सियासत में जमकर चर्चा हो रही है एक और राजकुमार रोत अपनी जीत के बाद कांग्रेस के अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा समेत दिग्गज नेताओं से भी मुलाकात करते हुए नजर आए, वहीं दूसरी ओर उन्होंने केबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और आज मंगलवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से भी मुलाकात की। इस पूरे घटनाक्रम से सियासत भी उनकी पॉलिटिक्स से हैरान है।
‘मैं हिंदू धर्म को नही मानता हूं’, कहकर सुर्खियों में आए थे राजकुमार
बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत लगातार अपनी पॉलिटिक्स से सियासत कल हैरान कर रहे हैं। इस बीच उनका एक बयान भी काफी सुर्खियों में रहा। इसमें उन्होंने कहा कि”मैं हिंदू नहीं हूँ! आदिवासी का धर्म हिंदू नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म का अपना रीति रिवाज अलग है और आदिवासी जाति समुदाय अलग है, आदिवासी जाति हिंदू नहीं है। इस दौरान उनसे पूछा गया कि उनका नाम राजकुमार भी हिंदू धर्म से ही जुड़ा है, तो उन्होंने कहा कि किस ग्रंथ में लिखा हुआ है कि राजकुमार नाम हिंदू धर्म का है। हम हिंदू धर्म नहीं मानते, न हीं ईसाई धर्म मानते हैं। उन्होंने चुन्नीलाल गरासिया का उदाहरण देते हुए कहा कि चुन्नीलाल ने भी अपने नॉमिनेशन फॉर्म में धर्म के कॉलम में हिंदू नहीं लिखा था।
