नई दिल्ली
एक्साइज पॉलिसी केस में जेल भेजे गए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दे दी। अदालत में केजरीवाल के जमानत का आदेश पर ईडी की ओर से 48 घंटे के लिए रोक लगाने की अपील भी की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय के आग्रह को खारिज कर दिया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 मार्च को दिल्ली आबकारी नीति मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप पर सीएम केजरीवाल को अरेस्ट किया था। हालांकि, अब करीब तीन महीने बाद 20 जून को उन्हें दिल्ली की अदालत से जमानत मिल गई। केजरीवाल को कोर्ट से जमानत मिलने पर आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने रिएक्ट किया। उन्होंने कहा- सत्यमेव जयते। हालांकि, अरविंद केजरीवाल जेल से बाहर आते इससे पहले ही ईडी ने मामले में हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने सुनवाई होने तक दिल्ली के मुख्यमंत्री की जेल से रिहाई पर रोक लगा दी।
नहीं चली ईडी की वो 48 घंटे वाली दलील
दिल्ली की कोर्ट में स्पेशल जज न्याय बिंदु ने सीएम केजरीवाल को जमानत देते हुए ईडी की 48 घंटे के लिए जमानत आदेश पर रोक लगाने की याचिका भी खारिज कर दिया। अदालत में सुनवाई के दौरान, ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने केजरीवाल की जमानत याचिका का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी के पास यह दिखाने के लिए प्रत्यक्ष सबूत हैं कि आम आदमी पार्टी के गोवा विधानसभा चुनाव अभियान के लिए इस्तेमाल किए गए पैसों को हवाला चैनलों के माध्यम से ट्रांसफर किया गया था।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या कुछ कहा गया
एसवी राजू के अनुसार, आरोपियों में से एक चरणप्रीत सिंह को कथित तौर पर 45 करोड़ रुपये मिले थे जो AAP ने गोवा कैंपेन के लिए इस्तेमाल किए थे। राजू ने केजरीवाल और विनोद चौहान के बीच दो चैट भी कोर्ट में दिखाए। उन्होंने अदालत से कहा कि चरणप्रीत सिंह लगातार विनोद चौहान (मामले में एक अन्य सह-अभियुक्त) के साथ चैट कर रहा था, जिसके केजरीवाल के साथ बहुत अच्छे संबंध थे। ये भी तर्क दिया गया कि केजरीवाल अपने फोन का पासवर्ड देने में सहयोग नहीं कर रहे थे क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा किया तो उनकी पूरी सच्चाई अलमारी से बाहर आ जाएगी।
इसलिए ईडी ने किया केजरीवाल की जमानत का विरोध
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि हो सकता है कि अरविंद केजरीवाल ने अपराध न किया हो, लेकिन वो आप के संयोजक हैं। ऐसे में पार्टी के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। अगर आम आदमी पार्टी किसी अपराध की दोषी है, तो आप भी उस क्राइम के दोषी हैं। यह धारा 70 PMLA के अनुसार है। हाल ही में ईडी की दायर चार्जशीट में AAP और केजरीवाल दोनों को आरोपी बनाया गया है।
केजरीवाल के वकील ने सुनवाई के दौरान क्या कहा
राजू की दलीलों का जवाब देते हुए, केजरीवाल का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे पता चले कि AAP को 45 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने कहा कि ईडी का हर आरोप अटकलों के घेरे में है। कोरियर के बयान हैं कि उन्होंने चरणप्रीत सिंह को नकद भुगतान किया था। हम कैसे कह सकते हैं कि केजरीवाल का इससे कोई लेना-देना है? चौधरी ने आगे कहा कि चरणप्रीत सिंह ने कभी नहीं कहा कि उन्होंने AAP के चुनाव प्रचार के लिए भुगतान किया था। चौहान के साथ सीएम की चैटिंग के आरोपों पर, विक्रम चौधरी ने कहा कि उनके बीच केवल दो चैट हुई थीं, जिनमें से दोनों का आबकारी नीति मामले से कोई लेना-देना नहीं था।
केजरीवाल के वकील ने ईडी के दावों को किया खारिज
केजरीवाल के वकील विक्रम चौधरी ने आगे कहा कि सबूत हंसी योग्य हैं। विनोद चौहान केजरीवाल को जन्मदिन की बधाई दे रहे। उनकी दलीलें मुख्य रूप से तीन आधारों पर थीं – गिरफ्तारी का समय, सबूतों की गुणवत्ता और यह तथ्य कि वह मूल अपराध में आरोपी नहीं था। चौधरी ने कहा कि सीएम को गिरफ्तार किए जाने से पहले डेढ़ साल से मामला लंबित था, और उनके खिलाफ सभी सबूत पहले ही एकत्र किए जा चुके थे। इस दौरान उन्होंने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें चुनाव की घोषणा होने पर ही गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने दावा किया कि एजेंसी ने जिन सबूतों पर भरोसा किया, वे केवल ‘दागी व्यक्तियों’ के बयान थे। इनमें मुख्य रूप से सह-आरोपी और अप्रूवर शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न बयानों में विरोधाभास हैं। केजरीवाल के खिलाफ पूरा मामला उन लोगों के बयानों पर आधारित है जिन्हें गिरफ्तार किया गया था। इन व्यक्तियों को जमानत का वादा किया गया था और वे अप्रूवर बन गए थे। उन्हें गैर-गिरफ्तारी और गैर-अभियोजन के प्रलोभन दिए गए थे।
21 मार्च को ईडी ने किया था केजरीवाल को गिरफ्तार
इसका मुकाबला करते हुए, राजू ने कहा कि एजेंसी न केवल अन्य आरोपियों के बयानों पर भरोसा कर रही थी, बल्कि मामले में केजरीवाल के खिलाफ सबूत थे। ईडी ने अब इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 21 मार्च को गिरफ्तार होने के बाद से केजरीवाल तिहाड़ जेल में बंद थे। उन्हें पिछले महीने लोकसभा चुनावों में प्रचार करने के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। फिर 2 जून को उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में राउज एवेन्यू कोर्ट के सामने दो जमानत याचिकाएं दायर की थीं। एक अंतरिम जमानत और दूसरी नियमित जमानत के लिए। 5 जून को अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। हालांकि, 20 जून को उन्हें कोर्ट ने बेल दे दी।
