लाहौर:
पाकिस्तान में जजों पर दबाव बनाने से रोकने के लिए लाहौर उच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला लिया है। लाहौर हाई कोर्ट ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय को निर्देश दिया है कि वह खुफिया ब्यूरो और आईएसआई समेत सभी नागरिक और सैन्य एजेंसियों को किसी भी न्यायाधीश या उनके कर्मचारियों से संपर्क करने पर रोक लगाने के लिए निर्देश जारी करे। शनिवार को न्यायमूर्ति शाहिद करीम ने एक लिखित आदेश में पांच एसओपी जारी किए। हाई कोर्ट का यह आदेश पंजाब प्रांत के सरगोधा में आतंकवाद निरोधी अदालत (एटीसी) के न्यायाधीश की तरफ से दर्ज की गई शिकायत पर की गई कार्यवाही के दौरान आया।
सरगोधा में आतंकवाद निरोधी अदालत के जज ने आरोप लगाया था कि एक खुफिया एजेंसी के अधिकारियों से मिलने से इनकार करने पर उनका उत्पीड़न किया गया था। जज ने रजिस्ट्रार के माध्यम से लाहौर हाई कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश शहजाद अहमद खान ने संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू की थी। मुख्य न्यायाधीश खान को सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त किए जाने के बाद यह मामला जस्टिस शाहिद करीम की अदालत में चल रहा है।
हाई कोर्ट ने पीएम को बताया जिम्मेदार
पिछले सुनवाई के दौरान, जस्टिस करीम ने कहा था कि खुफिया एजेंसियों की कार्रवाइयां प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अधिकार क्षेत्र में आती हैं और वह इसके लिए जिम्मेदार और जवाबदेह हैं। 27 जून को जारी एक लिखित आदेश में जस्टिस करीम ने कहा कि कुछ ऐसे मुद्दों पर आगे बढ़ना अनिवार्य है जो नियमित रूप से इस न्यायालय के सामने आते हैं। न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए इस मामले में निर्देश जारी करना आवश्यक है।
कोर्ट ने दिया लिखित आदेश
उन्होंने बाद उन्होंने आदेश दिया कि ‘प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा इंटेलिजेंस ब्यूरो और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) सहित सभी सिविल या सैन्य एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए जाएंगे कि वे भविष्य में किसी भी न्यायाधीश से संपर्क न करें। चाहे वह उच्च न्यायपालिका को हो या अधीनस्थ न्यायपालिका का या उनके स्टाफ का कोई सदस्य हो। पंजाब पुलिस के लिए भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए।
