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Thursday, April 23, 2026
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‘परीक्षा रद्द करने का सही तर्क दें अभ्यर्थी’, नीट मामले में SC की अहम टिप्पणी, छात्रों को फैसले का इंतजार

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नई दिल्ली

विवादों से घिरी नीट-यूजी 2024 परीक्षा मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने थोड़ी देर में अपना पैसला सुना सकता है। अदालत में तीन जजों की बेंच सुनवाई कर रही है। इसकी अध्यक्षता सीजेआई चंद्रचूड़ कर रहे हैं। इस मामले पर दायर ज्यादातर याचिकाओं पर सुनवाई पहले ही हो चुकी है लेकिन 40 याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। इसमें छात्रों ने मांग की है कि नीट की परीक्षा रद्द की जाए, जिस पर कोर्ट ने यह भी कहा कि परीक्षा करने के लिए छात्र कोई सही और जायज तर्क दें।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि चीफ जस्टिस ने दूसरी स्टेटस रिपोर्ट देखी है। इस पर सीजेआई ने जवाब दिया हां। वरिष्ठ वकील नरेंद्र हुडा ने मुख्य याचिका में दलीलें शुरू कीं है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा सीबीआई ने हमको अपनी स्टेटस रिपोर्ट दी है, लेकिन हम उसको सार्वजनिक नहीं कर सकते क्योंकि इससे सीबीआई की जांच पर असर पड़ सकता है।

पेपर लीक का भी उठा मुद्दा
पेपर लीक पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ी की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि आपको हमारे सामने यह साबित करना पड़ेगा की यह गड़बड़ी और लीक बड़े पैमाने पर हुई है और एग्जाम को रद्द करने के अलावा कोई और चारा नहीं है। कोर्ट पूछा कि सरकारी कॉलेज में कितनी सीट है याचिकाकर्ता के वकील ने कहा 56000 सीटें हैं। निजी कॉलेज में सीटों को लेकर पूछे गए सवाल पर जवाब दिया गया कि 52,000 सीटें हैं।

सीजेआई ने पूछे याचिकाकर्ताओं को न्यूनतम नंबर
सीजेआई ने परीक्षा रद्द करने वाले छात्रों के मुद्दे को लेकर पूछा कि याचिकाकर्ताओं को न्यूनतम कितने नंबर मिले हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि 131 छात्र ऐसे हैं, जो 1,08,000 छात्रों में शामिल नहीं है, जो दोबारा से परीक्षा चाहते हैं, जबकि 254 छात्र ऐसे हैं, जो पास हुए हैं और वे दोबारा एग्जाम नहीं चाहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि अगर आप हमारे सामने यह साबित कर देते हैं कि बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई तभी री-एग्जाम का आदेश दिया जा सकता है। याचिकाकर्ता छात्रों के वकील ने कहा कि कुछ ऐसे छात्र भी आए हैं जिनकी रैंक 1 लाख 8 हज़ार छात्रों के बीच है, लेकिन उनको सरकारी कॉलेज नहीं मिला है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ही कहा कि सरकार और NTA कोर्ट को यह बताएं टॉप 100 छात्र किस शहर, जिलें और सेंटर से आते हैं। इस पर सॉलीसीटर जनरल ने कहा कि बेंगलुरु से पांच छात्र हैं, कई छात्र अलग-अलग प्रदेश से हैं.।किसी शहर से एक किसी से शून्य भी हैं।’

क्या छात्रों के पास हैं सेंटर चुनने का ऑप्शन?
सुनवाई के दौरान पेपर लीक की चर्चा हुई तो चीफ जस्टिस ने एनटीए के वकील से पूछा कि जब उम्मीदवार एप्लिकेशन फॉर्म भरते हैं, तो उन्हें शहर या केंद्र का विकल्प चुनना होता है? इसके जवाब में एनटीए के वकील ने हां कहा। वकील ने बताया कि छात्रों के पास शहर चुनने का ऑप्शन होता है, वे सेंटर का चुनाव नहीं कर सकते हैं।

 

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