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Wednesday, May 6, 2026
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भारत के लिए आफत या राहत? ट्रंप के साथी जेडी वेंस अगर उपराष्ट्रपति बने तो क्या असर पड़ेगा

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नई दिल्ली

अमेरिकी चुनाव को लेकर पूरी दुनिया की दिलचस्पी बनी हुई है, इस एक चुनाव का परिणाम हर देश पर अपना असर डालने वाला है। कई पोल इस समय ऐसा अनुमान लगा रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर व्हाइट हाउस पहुंच सकते हैं, यानी कि उनके राष्ट्रपति बनने की संभावना ज्यादा जताई जा रही है। इस बीच ट्रंप के साथ-साथ जेडी वेंस की चर्चा भी काफी ज्यादा चल रही है। युवा हैं और रीपब्लिकन पार्टी के उप राष्ट्रपति उम्मीदवार भी। उनकी पत्नी भारतीय मूल की हैं, इस वजह से भारत में भी उनके नाम की चर्चा तो शुरू हो चुकी है।

अब जेडी वेंस अगर अमेरिका के उप राष्ट्रपति बन जाते हैं, कई देशों पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका की राजनीति में वेंस को ट्रंप की ही छाया माना जाता है, यानी कि जैसी सोच ट्रंप रखते हैं, उसी दिशा में वेंस भी आगे बढ़ते दिख जाते हैं। कई मामले में तो उनके विचार ट्रंप से भी ज्यादा कट्टर देखे गए हैं। अब पूरी दुनिया पर तो उनके फैसलों का असर पड़ ही सकता है, लेकिन भारत को भी सचेत होने की जरूरत है।

असल में भारत के चीन, रूस, यूरोप के साथ अहम रिश्ते हैं, आपसी साझेदारी चलती है। चीन से टकराव है, रूस से नजदीकी है और यूरोप के साथ भी व्यापार बढ़ता जा रहा है। लेकिन अमेरिका क्या पॉलिसी बनाता है, उसका इन सभी चीजों पर पड़ता है। इसी वजह से इस चुनाव में जिसकी जीत होगी, भारत पर भी असर देखने को मिलेगा। भारत के दूसरे देशों के साथ कैसे रिश्ते रहने वाले हैं, इस पर भी प्रभाव दिख जाएगा। इसी वजह से जेडी वेंस की विचारधारा को समझना जरूरी है, भारत पर पड़ने वाले संभावित असर को जानना भी जरूरी है।

डोनाल्ड ट्रंप की तरह जेडी वेंस भी चीन को सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी मानते हैं। उनका भी उदेश्य है कि चीन के प्रभाव को कम किया जाए। जिस तरह से पिछले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने चीन से लगातार पंगे लिए थे, यहां वेंस भी कोई नरम रुख नहीं अपनाते दिख रहे हैं। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने चीन को अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन बता दिया है। यह नहीं भूलना चाहिए कि पिछले साल चीन के खिलाफ लाए गए एक बिल को वेंस का पूरा समर्थन मिला था।

असल में उस बिल में कहा गया था कि अगर चीन इंटरनेशन ट्रेड कानूनों का सही तरीके से पालन नहीं करेगा, अगर वो अपनी मनमानी करता रहेगा तो अमेरिका के मार्केट में उसकी एंट्री को रोक दिया जाएगा। इसके ऊपर वेंस इस बात का भी समर्थन करते हैं कि चीन से Most Favored Nation वाला टैग वापस ले लेना चाहिए। अब भारत की नजर से अगर देखें तो अमेरिका अगर चीन को अपना विरोधी मानता है, नई दिल्ली के लिए अच्छी बात है। भारत अगर चीन का विकल्प बनता है, तो हर मामले में भारत की ही भलाई है।

यूरोप और रूस को लेकर क्या विचारधारा?
यूरोप इस समय थोड़ा परेशान चल रहा है। अगर वेंस उपराष्ट्रपति बन जाते हैं, उसे लग रहा है कि उसके लिए नई चुनौती खड़ी हो जाएगी। इसका एक उदाहरण मिल चुका है। असल में रूस-यूक्रेन का युद्ध चल रहा है, यूरोप लगातार जेलेंस्की के देश की मदद कर रहा है, उसमें अमेरिका की सहायता भी मिल रही है। अब उसी सहायता को लेकर वेंस ने एक बयान दिया है। उनका कहना है कि अमेरिका को ज्यादा खतरा चीन से है, ऐसे में उसका ध्यान वहां पर होना चाहिए। संदेश दिया गया है कि यूरोप अपने लिए जिस सुरक्षा की उम्मीद करता है, उसे सुनिश्चित करने के लिए उसे खुद ज्यादा बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।

इसके ऊपर यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की सक्रियता को भी वेंस कोई बहुत अच्छा नहीं मानते हैं। उनके मुताबिक यूक्रेन युद्ध में अमेरिका का कोई भी उदेश्य पूरा होता नहीं दिख रहा है। यानी कि यूक्रेन और यूरोप दोनों के लिए वेंस की विचारधारा समर्थन वाली तो नहीं रहने वाली है। अब भारत के लिए यहां पर कैच यह है कि अगर अमेरिका यूरोप को ज्यादा मदद नहीं करना चाहता है, उसे उम्मीद है कि यूएस की साझेदारी इंडो पैसिफिक क्षेत्र के साथ बढ़ सकती है, उस स्थिति में भारत को भी फायदा मिल जाएगा।

मिडल ईस्ट को लेकर क्या विचारधारा?
अब मिडल ईस्ट में वेंस भी इजरायल का खुलकर समर्थन करते हैं, यहां पर भी ट्रंप के साथ उनकी सोच पूरी तरह मेल खाती है। बात चाहे ज्यादा से ज्यादा फंड देने की हो या फिर बात हो दूसरी सहायता की, वेंस मानते हैं कि अमेरिका को मदद करनी चाहिए। वही दूसरी तरफ फिलिस्तीन को लेकर वेंस जो सोचते हैं वो कई देशों को रास नहीं आने वाला है। वे फिलिस्तीन के लोगों को कट्टर लोगों की एक आबादी के रूप में देखते हैं। अब यहां पर भारत के लिए मामला फंस सकता है क्योंकि इंडिया तो बैलेंसिंग एक्ट खेलता है। उसे इजरायल के साथ रिश्ते बनाए रखने हैं, लेकिन फिलिस्तीन को भी मदद करनी है।

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