नई दिल्ली
देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में शुमार सीबीआई को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्या सीबीआई की धार कुंद होती जा रही है? ये सवाल इसलिए उठे हैं क्योंकि कुछ राज्यों में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन को जांच के लिए वहां की सरकार से लिखित परमिशन लेना होगा। बिना कंसेंट लेटर के एजेंसी उस राज्य में जांच के लिए नहीं जा सकेगी। अब तक पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पंजाब, केरल और तेलंगाना में ही सीबीआई को जांच के लिए पूर्व परमिशन की जरूरत पड़ती थी। विपक्षी पार्टियों का आरोप रहा है कि केंद्र की बीजेपी सरकार अपने विरोधियों को निशाना बनाने के लिए संघीय एजेंसियों का इस्तेमाल करती है। इसी को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसी को जांच के लिए कुछ राज्य सरकारों ने इजाजत लेने के नियम बनाए थे। अब बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में भी जनरल कंसेंट जरूरी हो गया है।
एमपी सरकार का सीबीआई जांच पर बड़ा फैसला
एमपी छठवां राज्य है जहां सीबीआई को जांच के लिए जाने से पहले सूचना देना होगा। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य के भीतर सीबीआई के अधिकार का विस्तार करते हुए नया नोटिफिकेशन जारी किया। एमपी सरकार के कर्मियों से जुड़ी जांच के लिए पहले भी राज्य से पूर्व लिखित अनुमति की जरूरत पड़ती थी। अब नए नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी दूसरे मामलों के लिए राज्य से पूर्व सामान्य सहमति और केस-दर-केस अनुमति लेना होगा।
जांच एजेंसी के एक्शन पर पड़ेगा असर
CBI को राज्य में किसी भी व्यक्ति, सरकारी अधिकारी या संस्था की जांच के लिए मध्य प्रदेश प्रशासन से लिखित अनुमति लेनी होगी। एमपी सरकार की परमिशन के बिना सीबीआई जांच नहीं कर सकेगी। जिस तरह एमपी समेत दूसरे राज्यों ने सीबीआई से कंसेंट की डिमांड की है उससे केंद्रीय एजेंसी की जांच पर असर पड़ेगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वो निष्पक्ष तौर से अपनी जांच कर पाएगी।
सीबीआई कैसे करेगी जांच
सवाल ये भी है कि अगर किसी व्यक्ति, संस्था या केस जुड़ी डिटेल्स सीबीआई अगर राज्य सरकार और प्रशासन को देगी तो क्या मामला गोपनीय बना रहेगा? सवाल ये भी कि जिस केस की जांच के लिए सीबीआई आगे बढ़ रही क्या सूचना के बाद उस मामले में सटीक जानकारियां मिल सकेंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि सीबीआई के अधिकारी किसी केस की जांच में डायरेक्ट एंट्री करते हैं उनके हाथ अहम सुराग लग सकते हैं। वहीं अगर पूर्व सूचना के बाद कार्रवाई की जाएगी तो ये कितनी सफल होगी इस पर सवाल उठना लाजमी है।
