इस्लामाबाद
पाकिस्तान अपने परमाणु बल को बढ़ाने और नई डिलीवरी प्रणाली विकसित करने में लगा हुआ है। पाकिस्तान का पूरा परमाणु कार्यक्रम भारत के साथ प्रतिद्वंद्विता को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ रहा है। यही वजह है कि पाकिस्तान की नजर अब परमाणु त्रयी पर है, जिसमें जमीन, हवा और समुद्र तीनों जगह से न्यूक्लियर हथियारों को लॉन्च करने की क्षमता हासिल करना है। भारतीय नौसेना के पूर्व खुफिया प्रमुख रीयर एडमिरल सुदर्शन श्रीखंडे ने पाकिस्तान की इस खतरनाक ख्वाहिश को लेकर चिंता जताई है। श्रीखंडे ने पाकिस्तान की नई हंगोर क्लास पनडुब्बी की तरफ ध्यान दिलाया है, जिसे वह अपने दोस्त चीन से हासिल कर रहा है।
परमाणु हथियार लॉन्च करने वाली पनडुब्बी
हंगोर-क्लास सबमरीन, चीनी टाइप 039A युआन क्लास का एक निर्यात किया जाने वाला संस्करण है। यह एक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन है, जिसका नाम अब रिटायर हो चुकी PNS हंगोर के नाम पर रखा गया है। पीएनएस हंगोर ने 1971 के युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस खुखरी को डुबो दिया था। दावा किया गया है कि यह पनडुब्बी 450 किमी की दूरी तक मार करने और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बाबर-3 मिसाइल को लांच करने की क्षमता से लैस होगी।
भारत जैसी ताकत की चाह
श्रीखंडे ने इसे पाकिस्तान की परमाणु त्रयी को हासिल करने की इच्छा का उदाहरण बताया है। यहां ध्यान देने की बात है कि भारत पहले से ही थल, जल और आकाश से परमाणु हथियार की लॉन्च करने की पूर्ण क्षमता रखता है। श्रीखंडे का मानना है कि भारत की इसी क्षमता को देखते हुए अब पाकिस्तान भी इसे हासिल करने के लिए बेकरार है। वर्तमान में केवल चार देशों के पास ही परमाणु त्रयी है, जिसमें भारत के अलावा अमेरिका, रूस और चीन शामिल हैं। पाकिस्तान के पास आंशिक परमाणु त्रिकोण है।
पाकिस्तान के पास नहीं है क्षमता
पाकिस्तान जमीन, हवा और समुद्री प्लेटफॉर्म से परमाणु हथियार लॉन्च कर सकता है लेकिन पनडुब्बी से वह केवल क्रूज मिसाइलें ही तैनात कर सकता है। पूर्ण परमाणु त्रिभुज के लिए पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल को लॉन्च करने की क्षमता आवश्यक है। पाकिस्तान के पास समुद्र से लॉन्च की जाने वाली परमाणु हथियार सक्षम मिसाइल बाबर-3 है। हालांकि, यह पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली क्रूज मिसाइल है, न कि बैलिस्टिक मिसाइल। पाकिस्तान के लिए चीन में निर्मित हंगोल क्लास की पनडुब्बी को 26 अप्रैल को वुहान के शिपयार्ड में लॉन्च किया गया था। यह इस श्रेणी की आठ पनडुब्बियों में से पहली थी, जिसे पाकिस्तानी नौसेना 2028 तक अपने बेड़े में शामिल करने वाली है।
