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Wednesday, April 22, 2026
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खनिजों के कर पर 8-1 का फैसला, बहुमत के खिलाफ फैसला देने वालीं अकेली जज कौन?

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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने खनिजों पर टैक्स को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि संविधान के तहत राज्यों के पास खदानों और खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने का विधायी अधिकार है। शीर्ष कोर्ट के नौ जजों की संविधान पीठ ने 8:1 के बहुमत से सुनाया। इसमें कहा गया कि खनिजों पर देय ‘रॉयल्टी’, टैक्स नहीं है। इस तरह सुप्रीम कोर्ट में खनिज संपन्न राज्यों की बड़ी जीत हुई है। कोर्ट ने खनिज-युक्त भूमि पर रॉयल्टी लगाने के राज्य सरकारों के अधिकार को बरकरार रखा है। ऐतिहासिक 8:1 फैसले में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने फैसला सुनाया। वहीं जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस बेंच में अकेले असहमति वाला फैसला सुनाया। जानिए उन्होंने क्या टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
मिनरल टैक्स पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसला आ चुका है। इसमें केंद्र सरकार को झटका लगा है। CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि रॉयल्टी टैक्स नहीं है। इस पीठ में जस्टिस बीवी नागरत्ना ने बहुमत के फैसले से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि एमएमडीआर एक्ट के तहत रॉयल्टी भुगतान की प्रकृति अद्वितीय है। इस दृष्टिकोण से देखा जाए तो एमएमडीआर अधिनियम के तहत रॉयल्टी भुगतान एक प्रकार का टैक्स है। उन्होंने कहा कि एमएमडीआर अधिनियम की वैधानिक योजना के तहत, पट्टेदार को खनिज अधिकारों का कोई भी प्रयोग रॉयल्टी भुगतान के अधीन है। रॉयल्टी की वसूली प्रकृति में वैधानिक है। मेरा मानना है कि रॉयल्टी टैक्स या वसूली की प्रकृति में है।

जस्टिस नागरत्ना ने क्या कहा
जस्टिस नागरत्ना ने फैसले के दौरान माना कि राज्यों को खनन गतिविधियों या खनिज इस्तेमाल पर कोई टैक्स या उपकर लगाने का कोई अधिकार नहीं है। एमएमडीआर अधिनियम की धारा 9 और 9ए खनिज अधिकारों के प्रयोग पर कोई भी कर लगाने की राज्यों की शक्ति पर प्रतिबंध और सीमा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन अधिकारों के लिए भुगतान की गई रॉयल्टी ऐसे अधिकार की वैधानिक वसूली है। उन्होंने केंद्र के इस रुख से भी सहमति जताई कि राज्यों को खनिज इस्तेमाल पर कर लगाने की अनुमति देना देश में खनिज डेवलपमेंट के खिलाफ होगा।

इससे डबल टैक्सेशन होगा- जस्टिस नागरत्ना
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अनिवार्य वसूली के रूप में रॉयल्टी ने टैक्स के सभी मापदंडों को पूरा किया है। इसलिए राज्यों को रॉयल्टी पर उपकर या कोई अन्य शुल्क लगाने या इसे भूमि राजस्व के रूप में परिभाषित करने की शक्तियों से वंचित किया जाता है। रॉयल्टी पर इस तरह का राज्य शुल्क देश के खनिज विकास के खिलाफ है। जस्टिस नागरत्ना ने निष्कर्ष निकाला कि अगर राज्यों को खनिज उपयोग या खनन गतिविधियों पर टैक्स लगाने की अनुमति दी जाती है, तो इससे डबल टैक्सेशन होगा। उन्होंने कहा कि संवैधानिक मंशा को देखते हुए यह अस्वीकार्य है। इस प्रकार रॉयल्टी खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने का साधन नहीं हो सकती है। इस प्रकार, राज्यों की ओर से इसका सहारा लेने से असर पड़ेगा।

कौन हैं जस्टिस बीवी नागरत्ना
खनिजों के टैक्स पर सुप्रीम कोर्ट में 8-1 से ऐतिहासिक फैसला आया। इसमें बेंच से अकेले असहमति जताने वाली जस्टिस बीवी नागरत्ना हैं। उन्होंने इससे पहले भी कई बड़े फैसले दिए हैं। शांत स्वभाव वाली नागरत्ना अपने सख्त फैसलों के लिए जानी जाती हैं। नोटबंदी से लेकर अभिव्यक्ति की आजादी तक फैसले में नागरत्ना का टफ स्टैंड साफ दिख जाता है। बिलकिस बानो केस में भी जस्टिस नागरत्ना ने गुजरात सरकार को जमकर फटकारा। 30 अक्टूबर 1962 को जन्मीं नागरत्ना 2027 में देश की पहली महिला चीफ जस्टिस बनेंगी। नागरत्ना ने 31 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट की जज बनी थीं। वह 30 अक्टूबर 2027 को अपने पद से रिटायर होंगी। नागरत्ना 28 अक्टूबर 1987 को उन्होंने बतौर वकील अपनी शुरुआत की थी। नागरत्ना ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री हासिल की है।

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