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‘जीत का क्रेडिट लेने तो कूद पड़ते हैं…’, ओलंपिक के बीच भिड़े दो भारतीय बैडमिंटन स्टार

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पेरिस,

भारतीय बैडमिंटन के लिहाज से पेरिस ओलंपिक 2024 बिल्कुल भी अच्छा नहीं रहा है. इस खेल में भारत को कोई मेडल नहीं मिला है. 2012 के बाद से ऐसा पहली बार है, जब‍ भारत किसी ओलिंपिक में बैडमिंटन में मेडल जीतने में नाकाम रहा. ब्रॉन्‍ज मेडल मैच में लक्ष्‍य सेन भी हार गए.

लक्ष्य की हार के साथ ही बैडमिंटन में मेडल जीतने का सपना भी टूट गया. इसके बाद लक्ष्य कोच प्रकाश पादुकोण बुरी तरह गुस्सा गए और उन्‍होंने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अब हार की जिम्मेदारी खिलाड़ियों को लेनी चाहिए. इसमें फेडरेशन और सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते.

प्रकाश का यह बयान सामने आते ही स्टार बैडमिंटन प्लेयर अश्विनी पोनप्‍पा भड़क गईं. अश्विनी ने पेरिस ओलिंपिक से बाहर होने के ओलिंपिक से संन्‍यास ले लिया है. उन्होंने सोशल मीडियो पोस्ट के जरिए कहा कि कोई खिलाड़ी जीतता है, तो हर कोई क्रेडिट लेने कूद पड़ता है. हार पर कोई सामने नहीं आता.

कोच को जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाता?
अश्विनी ने इंस्‍टाग्राम पर प्रकाश पादुकोण का बयान शेयर किया. साथ ही अपनी बात भी लिखी. उन्होंने कहा, ‘ये देखकर काफी निराशा हुई. यदि कोई खिलाड़ी जीतता है, तो हर कोई उसका क्रेडिट लेने के लिए कूद पड़ता है और यदि वो हार जाता है तो क्या ये सिर्फ खिलाड़ी की गलती है?’

अश्विनी ने आगे लिखा, ‘कोचों को तैयारी में कमी और खिलाड़ी को तैयार ना करने के लिए जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाता? जीत का श्रेय लेने वाले वे पहले व्यक्ति होते हैं. अपने खिलाड़ियों की हार की जिम्मेदारी भी क्यों नहीं लेते? आखिरकार जीतने के लिए टीम की कोशिश लगती है और हारना भी टीम की जिम्मेदारी है. आप अचानक खिलाड़ी पर सारा दोष नहीं डाल सकते.’

‘अब समय आ गया है कि खिलाड़ी भी जिम्मेदारी लें’
प्रकाश पादुकोण ने हार के लिए खिलाड़ियों से जिम्मेदारी लेने की बात कही थी. उन्होंने कहा था, ‘1964 में मिल्खा सिंह और 80 के दशक में पीटी उषा के बाद, हमने कई खिलाड़ियों को चौथे स्थान पर देखा. मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि खिलाड़ी भी जिम्मेदारी लें.’

उन्होंने कहा था, ‘कम से कम इस ओलिंपिक और पिछले ओलिंपिक के रिजल्‍ट के लिए आप फेडरेशन और सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते. वो जो कुछ भी कर सकते थे, उन्‍होंने किया. आखिरकार खिलाड़ियों पर जिम्मेदारी होती है कि वो उस समय अच्छा प्रदर्शन करें, जब सबसे ज्यादा जरूरत हो.’

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