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जब भारत खुद हाईटेक हथियार बना रहा है तो… अमेरिका से रायफल खरीदने पर विवाद

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नई दिल्ली

भारत की अर्थव्यवस्था जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से भारत रक्षा क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। भारत एक से बढ़कर एक हाईटेक हथियार बना रहा है। चीन, पाकिस्तान, अमेरिका समेत देश के अधिकांश देश भारत की बढ़ती ताकत पर नजर जमाए बैठे हैं। लेकिन इस बीच भारत की एक डिफेंस डील चर्चा का विषय बनी हुई है। या यूं कह सकते हैं कि इस डील ने विवाद खड़ा कर दिया है। दरअसल भारतीय सेना ने अमेरिकी कंपनी SIG SAUER से अतिरिक्त 73,000 SIG716 राइफलों के सप्लाई के लिए दूसरे खरीद कॉन्ट्रेक्ट का ऐलान किया है। यह फैसला सेना के आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है, लेकिन यह कदम कई सवाल भी खड़े करता है। पहले से ही 72,400 राइफल खरीदने के बाद अब और राइफल खरीदना, क्या रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहे भारत के लिए फायदे का सौदा है।

भारतीय सेना की ओर से विदेशी हथियारों की खरीद पर सवाल उठते रहे हैं, जबकि देश के निजी क्षेत्र ने सेना के लिए मेड इन इंडिया हथियार उपलब्ध कराने का प्रयास किया है। हाल ही में अमेरिकन SIG716 राइफलों के ऑर्डर के बाद बेंगलुरु की SSS डिफेंस के सीईओ विवेक कृष्णन ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। विवेक कृष्णन ने कहा है कि यह फैसला ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने के लिए एक झटका है। कृष्णन का कहना है कि भारतीय कंपनियां सेना की जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम हैं। लेकिन सरकार की ओर से विदेशी कंपनियों को तरजीह दिए जाने से उन्हें निराशा होती है।

‘देश में रोजगार के अवसर बढ़ते…’
कृष्णन ने आगे कहा, ‘सरकार को हथियारों के स्वदेशी डिजाइन और निर्माण को बढ़ावा देना चाहिए था। सरकार को भारतीय कंपनियों को मौका देना चाहिए था और उन्हें इस राइफल के निर्माण के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए था। इससे न केवल देश में रोजगार के अवसर बढ़ते बल्कि भारत आत्मनिर्भर भी बनता। छोटे हथियार बनाने वाली कई भारतीय कंपनियां बेहतरीन काम कर रही हैं और उन्हें बस सरकार के समर्थन की जरूरत है। पड़ोसी देशों को देखते हुए हमें अपनी रक्षा के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।’

क्या है खासियत?
भारत ने अमेरिका से 73,000 SIG716 असॉल्ट राइफल की डील की है। खास बात है कि ये सेना के लिए पहले खरीदी गईं ऐसी 72 हजार 400 बंदूकों के जखीरे में शामिल होंगी। SiG-716 राइफल्स 7.62x51mm कैलिबर गन होती हैं, जिनकी मारने की क्षमता 500 मीटर होती है। ये चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर तैनात सैनिकों को दी जाएगी।

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