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जो भी खर्चा होगा वो मैं दूंगा… लहूलुहान पड़े शख्स के लिए ‘फरिश्ता’ बने DCP शशांक, ऐसे बचाई बुलेट सवार की जान

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नई दिल्ली

सड़क पर कोई हादसा हो जाए, तो सीन कुछ ऐसा होता है कि देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो जाती है, लोग वीडियो बनाने लगते हैं, मगर सबसे जरूरी काम जो होते हैं, वो कोई नहीं करता। जैसे घायल को अस्पताल ले जाना, पुलिस या एंबुलेंस को कॉल करना आदि। इसके लिए दिल्ली सरकार ने ‘फरिश्ते योजना’ भी शुरू की थी।

कल रात महिपालपुर बायपास के पास कुछ ऐसा ही नजारा था। सड़क पर एक बुलेट बाइक सवार घायल पड़ा था। कुछ लोग उसे घेरकर खड़े थे। इस बीच वहां से एक आईपीएस ऑफिसर गुजर रहे थे। वह भीड़ देखकर रुक गए। उन्होंने जैसे ही देखा कि सड़क दुर्घटना में कोई घायल हो गया है, तो वह फौरन घायल को लेकर ऑटो में बैठ गए। वह उन्हें पास के अस्पताल ले गए, जहां उनका इलाज जारी है। घायल का इलाज शुरू करवाने के बाद उन्होंने पीसीआर कॉल भी की। लोकल पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी देकर वह वहां से निकल गए।

जो भी खर्चा होगा वो मैं दूंगा…
पुलिस सूत्र ने बताया, वसंत कुंज साउथ पुलिस को कल रात करीब 8:45 बजे इलाके के एक प्राइवेट अस्पताल से आईपीएस ऑफिसर शशांक जायसवाल ने एक सड़क दुर्घटना की सूचना दी थी। पुलिस मौके पर पहुंची, तो पता चला कि ऑफिसर ने घायल अवस्था में अनिल कुमार (55) को एडमिट करवाया है। जो उन्हें महिपालपुर बायपास के पास घायल हालत में पड़े मिले थे। वहां उनकी बुलेट बाइक भी खड़ी हुई थी। गाड़ी ऊंची थी, इसलिए उन्होंने घायल को ऑटो में लिटा दिया था। वह भी ऑटो में सवार हो गए थे। उनकी गाड़ी ऑटो के आगे चलते हुए रास्ता बनवा रही थी। जिसके चलते समय से घायल को अस्पताल पहुंचाया जा सका। अस्पताल प्रशासन ने इलाज शुरू करने से पहले कहा, यह प्राइवेट अस्पताल है, इलाज के पैसे कौन देगा। ऐसे में ऑफिसर ने यह तक कह दिया कि आप इलाज शुरू कीजिए, जो भी खर्चा होगा मैं दे दूंगा। आईपीएस ऑफिसर दिल्ली पुलिस में इन दिनों डीसीपी ट्रैफिक हेड क्वार्टर और वीवीआईपी रूट के पद पर कार्यरत हैं।

घायल का नहीं हो सका बयान
घटनास्थल वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस के अंतर्गत आता है। इसलिए मामले की सूचना वहां की पुलिस को दी गई। अब वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। आज सुबह खबर लिखे जाने तक घायल अनिल की हालत खतरे से बाहर थी। जांच में पता चला है कि वह किसी काम से धौला कुंआ जा रहे थे। उसी दौरान यह हादसा हुआ। उनके सिर, नाक और हाथ पर गंभीर चोट लगी है, जिसके चलते उनका बयान नहीं हो सका था। जिस कारण यह भी साफ नहीं हो पाया कि कोई गाड़ी उन्हें हिट करके गई या संतुलन बिगड़ने या अन्य किसी वजह से यह हादसा हुआ।

क्या है फरिश्ते दिल्ली के योजना
‘फरिश्ते दिल्ली के’ योजना के तहत कोई भी शख्स अगर सड़क हादसे में घायल होता है, तो उसे निजी अस्पताल में इलाज की सुविधा मिलती है। इसका पूरा खर्चा सरकार उठाती है। दिल्ली सरकार ने इसे 2018 में शुरू किया था। हालांकि यह फंड की कमी से बंद हो गई थी। आप सरकार ने आरोप लगाया था, एलजी कार्यालय फंड रिलीज नहीं कर रहा। इतना ही नहीं, आप ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर योजना फिर शुरू कराने की मांग की थी। सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जवाब तलब किया था।

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