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Saturday, April 18, 2026
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अगर नियमों के मुताबिक गिरफ्तारी नहीं हुई तो आरोपी को रिहा करना ही होगा, साफ-साफ बोला सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली

भूषण स्टील के मालिक नीरज सिंघल को सुप्रीम कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया है। सिंघल पर 46,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के दौरान ईडी ने सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो, अगर जांच एजेंसी गिरफ्तारी के दौरान सही प्रक्रिया का पालन नहीं करती है तो आरोपी को रिहा किया जाना चाहिए। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने सिंघल की रिहाई की याचिका मंजूर कर ली। कोर्ट ने माना कि सिंघल पर लगे आरोप गंभीर हैं। इन आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता क्योंकि इनसे अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है और बाजार में अस्थिरता आती है।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि ईडी ने सिंघल को गिरफ्तारी का कारण लिखित में नहीं बताया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, गिरफ्तारी का कारण लिखित में बताना जरूरी है। ईडी ने ऐसा नहीं किया, इसलिए सिंघल को राहत मिली। कोर्ट ने कहा, ‘हमें कानून के मुताबिक काम करना होगा। यहां प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है। इससे बाजार में अस्थिरता आई और खातों में हेरफेर किया गया। यह समाज के साथ धोखाधड़ी है, लेकिन कानून का पालन नहीं किया गया।’

भविष्य में ये गलती दोबारा ना हो: सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि एजेंसी भविष्य में इस गलती को नहीं दोहराएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि नियमों का पालन न करने पर अदालतों को सख्त होना होगा। सिंघल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वह करीब 16 महीने से हिरासत में हैं और पंकज बंसल मामले में शीर्ष अदालत के फैसले का पालन नहीं किया गया। हालांकि, पीठ ने इस पर कोई टिप्पणी करने से परहेज किया कि क्या सिंघल को दोबारा गिरफ्तार किया जा सकता है। जस्टिस खन्ना ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि आप उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर सकते हैं या नहीं। मैं इस बारे में पूरी तरह से निश्चिंत नहीं हूं। मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहूंगा।’

किन शर्तों पर मिली रिहाई?
अदालत ने निर्देश दिया कि सिंघल को निचली अदालत की ओर से तय की जाने वाली शर्तों पर रिहा किया जाए। इसके अलावा, उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और देश नहीं छोड़ना होगा। सिंघल ने दिल्ली हाई कोर्ट के 8 जनवरी के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका और गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी।

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