नई दिल्ली
चुनावी समर के लिए तैयार हो चुके झारखंड में एनडीए ने सीटों का बंटवारा फाइनल कर लिया है। 81 विधानसभा सीटों में से बीजेपी 68, आजसू 10, जेडीयू 2 और लोजपा (रामविलास) एक सीट पर चुनाव लड़ेगी। बीते कई महीने से झारखंड में चुनाव लड़ने के लिए जेडीयू और लोजपा (रामविलास) भी तैयारी कर रहे थे लेकिन उन्हें काफी कम सीटें दी गई हैं।झारखंड में दो चरणों में 13 और 20 नवंबर को वोटिंग होगी। 23 नवंबर को वोटों की गिनती की जाएगी।
शिवराज, सरमा को दी कमल खिलाने की जिम्मेदारी
झारखंड में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए विपक्षी दल बीजेपी ने पूरी ताकत लगाई हुई है। पार्टी ने बेहद अनुभवी और लंबे वक्त तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान, असम के मुख्यमंत्री और हिंदुत्व के पोस्टर ब्वॉय हिमंता बिस्वा सरमा जैसे वरिष्ठ नेताओं को झारखंड चुनाव में कमल खिलाने का टास्क दिया है। झारखंड एनडीए में बीजेपी के अलावा ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू), बिहार की सरकार में भागीदार जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) शामिल हैं।
जबकि विपक्षी इंडिया गठबंधन में झामुमो, कांग्रेस, आरजेडी और वाम दल शामिल हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हार मिलने की एक वजह यह भी मानी गई थी कि पार्टी ने आजसू से गठबंधन तोड़ दिया था लेकिन राजनीतिक मजबूरियों के चलते दोनों दल फिर से साथ आए हैं और 2024 का लोकसभा चुनाव भी उन्होंने मिलकर लड़ा। 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को राज्य की 14 में से 8 सीटों पर जीत मिली और एक सीट पर आजसू जीती जबकि इंडिया गठबंधन ने 5 सीटों पर कब्जा जमाया।
सीट बंटवारे के साथ ही यह सवाल भी खड़ा हुआ है कि क्या नीतीश कुमार और चिराग पासवान सिर्फ 2 और 1 सीट लेकर खुश हैं? बताया जा रहा है कि बीजेपी ने अपने सहयोगी दलों को स्पष्ट रूप से बता दिया है कि विधानसभा चुनाव में उसका लक्ष्य किसी भी कीमत पर हेमंत सोरेन की सरकार को सत्ता से हटाना है और इसलिए सीट बंटवारे के मामले में सभी को लचीला रुख अपनाना होगा।
आरक्षित लोकसभा सीटों पर मिली एनडीए को हार
लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद झारखंड में बीजेपी के प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व ने सक्रियता बढ़ाई है क्योंकि राज्य में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सभी पांचों सीटों पर बीजेपी को हार मिली थी। ये सीटें- खूंटी, सिंहभूम, लोहरदगा, दुमका और राजमहल हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में इसमें से सिर्फ 2 सीटों (राजमहल और सिंहभूम) पर इंडिया गठबंधन में शामिल दलों को जीत मिली थी लेकिन इस बार उसने सभी पांचों सीटें जीत ली हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों में और विशेषकर आदिवासी बेल्ट वाली सीटों पर हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी का असर दिखाई दिया था।
