जमशेदपुर
पिछली बार कोल्हान क्षेत्र में अपना खाता न खोल पाने वाली बीजेपी इस बार 14 सीटों वाले इस इलाके में अपना पूरा दम लगा रही है। इसके लिए पार्टी ने जहां एक ओर जेएमएम के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन को तोड़ा तो वहीं दूसरी ओर उसने बड़े नेताओं के पारिजनों को टिकट देने में कोई कोताही नहीं बरती।
बीजेपी 4 सीटों पर बेटे, पत्नी और बहू को दिया मौका
14 सीटों में से चार सीटों पर बीजेपी ने अपने बड़े नेताओं के बेटे, पत्नी और बहू को मौका दिया है। जिसके चलते अपने दलों से लेकर आम आदमी तक के निशाने पर है। जमशेदपुर के एक सरकारी स्कूल में साइंस की रिटायर्ड टीचर कहती हैं कि भाजपा ने नेताओं की पत्नी से लेकर बेटे और बहू तक को चुनावी मैदान में उतार दिया है, फिर वह दूसरे दलों पर परिवारवाद का आरोप कैसे लगा सकती है? उनका कहना था कि बीजेपी गांधी परिवार पर परिवारवाद का आरोप लगाती है, लेकिन राजनीति में बने रहने के लिए आज वह भी परिवार के लोगों को ही आगे ला रही है तो फिर बीजेपी परिवारवाद की बातें किस मुंह से करती है।
चार पूर्व सीएम के परिवार वालों को टिकट
कोल्हान इलाके दो जिलों पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम की चार सीटों पर बीजेपी ने बड़े नेताओं के परिवार वालों को टिकट दिया है। रोचक है कि यह चारों ही बड़े नेता झारखंड के पूर्व सीएम रह चुके हैं। इनमें जमशेदपुर ईस्ट से ओडिशा के राज्यपाल और झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास की पुत्रवधू पूर्णिमा दास, घाटशिला से पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन, पोटका से पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा और जगन्नाथपुर से पूर्व सीएम मधुकोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा को उतारा है।
बीजेपी के स्थानीय नेताओं में असंतोष तो कई बागी बने
यही वजह है कि कोल्हान इलाके में लंबे समय से इन सीटों पर काम कर रहे पार्टी के स्थानीय नेताओं में खासा असंतोष है। कई सीटों पर बागी उम्मीदवार भी मैदान में हैं। पूर्णिमा दास के सामने जमशेदपुर ईस्ट सीट से शिव शंकर सिंह बागी होकर निर्दलीय लड़ रहे हैं। शिव शंकर सिंह ने ही पार्टी के भीतर बढ़ाते परिवारवाद का मुद्दा उठाते हुए बगावती सुर बुलंद किए थे। वहीं दूसरी और जेएमएम बीजेपी पर निशाना साधते हुए कह रही है कि वह वंशवाद की राजनीति पर उपदेश तो देती है, लेकिन उसे अपने गिरेबान में भी झांक लेना चाहिए।
वही जमशेदपुर के एलएलबी स्टूडेंट मंडल का कहना था कि गीता कोड़ा को छोड़कर बाकी किस नेता के परिवारीजन ने राजनीति या जनसेवा का काम किया है। किसी बड़े नेता की पत्नी या बेटा बहु होना ही आपके लिए राजनीति में किस्मत के दरवाजे खोल सकता है।
पुत्र के लिए बीजेपी में शामिल हुए चंपाई सोरेन!
घाटशिला चंपई के बेटे बाबूलाल सोरेन मैदान में है। इनके बारे में कहा जाता है कि चंपई सोरेन के बीजेपी में जाने की एक बड़ी वजह बेटे का दबाव भी था। चंपई सोरेन काफी समय से अपने बेटे के लिए टिकट चाह रहे थे, लेकिन हेमंत सोरेन ने देने से मना कर दिया। कहा जाता है कि शुरू में चंपई सोरेन इसके लिए तैयार नहीं थे, लेकिन बेटे ने ही पिता को बीजेपी में जाने के लिए तैयार किया। घाटशिला में उनका मुकाबला हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री रामदास से है। चंपई सोरेन के पार्टी छोड़ने के बाद कोल्हान से उनकी जगह रामदास को मंत्रिमंडल में जगह दी थी। हालांकि बाबूलाल सोरेन कई विवाद भी जुड़े हुए हैं।
