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Monday, April 6, 2026
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जापान को बड़ा झटका, ताइवान के पास रणनीतिक एयरबेस ठप, दक्षिण चीन सागर में चीन की बल्ले-बल्ले

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टोक्यो

दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता के खिलाफ तैयारी में जुटे जापान को बड़ा झटका लगा है। उसका एक महत्वपूर्ण रणनीतिक द्वीप एयरबेस ठप हो गया है। इससे ताइवान पर चीन के हमले के समय जापान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता प्रभावित हो रही है। यह एयरबेस क्यूशू के दक्षिण में एक सुदूर ज्वालामुखी द्वीप पर स्थित है। इस द्वीप का नाम मैगेशिमा है। पहले जापान इसे अत्याधुनिक सैन्य एयरबेस बनाना चाहता था, लेकिन अब यह महत्वकांक्षी योजना ठप हो गई है। मैगेशिमा एयरबेस को 2027 तक ऑपरेशनल होना था। लेकिन, जैसे-जैसे निर्माण आगे बढ़ रहा है, ताइवान संकट के खतरे के खिलाफ जापान की सुरक्षा को मजबूत करने की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।

मगेशिमा एयरबेस को बनाने में क्या दिक्कत आ रही
रक्षा मंत्रालय ने पिछले साल पुष्टि की थी कि एयरबेस अब मार्च 2030 के अंत में चालू होने की उम्मीद है। जापानी अधिकारी इस देरी के लिए चुनौतियों के एक तूफान को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि नोटो प्रायद्वीप पर भूकंप से क्षतिग्रस्त क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए निर्माण दल को भेजा जाना, कच्चे माल की कमी और अप्रैल में खुलने वाले ओसाका वर्ल्ड एक्सपो की तैयारियों से जुड़ी बढ़ती लागत के कारण एयरबेस के निर्माण में देरी हो रही है। यहां तक कि प्रकृति ने भी इस परियोजना के खिलाफ है। दक्षिण-पश्चिम जापान में खराब मौसम ने द्वीप पर भारी मशीनरी की डिलीवरी में बार-बार देरी की है, जिससे महत्वपूर्ण बंदरगाह सुविधाओं के निर्माण में और भी देरी हुई है।

जापान की रक्षा तैयारियों को बड़ा झटका
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से बात करते हुए टोक्यो इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्ट्रैटेजी के एसोसिएट प्रोफेसर रियो हिनाता-यामागुची ने कहा, “ओकिनावा और क्यूशू के क्षेत्र में खतरों के बढ़ने के परिणामस्वरूप दक्षिण-पश्चिम जापान में अधिक ठिकानों और बेहतर बुनियादी ढांचे की भारी मांग है।” तानेगाशिमा से केवल 12 किमी (7.5 मील) पश्चिम में स्थित जापान की सबसे बड़ी स्पेस लॉन्च फैसिलिटी मगेशिमा, क्यूशू के दक्षिण में एक महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। इस द्वीप का सामरिक महत्व केवल इसलिए बढ़ा है क्योंकि इस क्षेत्र में चीन की सैन्य उपस्थिति लगातार बढ़ रही है।

मगेशिमा पर एयरबेस क्यों बनाना चाहता है जापान
मगेशिमा की सैन्य क्षमता को पहली बार 2009 में पहचाना गया था, जब जापान ने अमेरिकी नौसेना के लिए अपने विमान वाहक स्क्वाड्रनों के लिए टच-एंड-गो लैंडिंग अभ्यास करने के लिए दूर-दराज के इवो जीमा की जगह एक वैकल्पिक साइट की तलाश शुरू की थी। केवल 8.2 वर्ग किमी (3.1 वर्ग मील) में, द्वीप का छोटा आकार और निर्जन स्थिति इसे एक आदर्श एयरबेस बनाती है। इसे पूरी तरह से चालू एयरबेस में बदलकर, जापान का लक्ष्य क्षेत्र के अन्य ठिकानों पर दबाव को कम करना है – विशेष रूप से ओकिनावा पर, जहां शोर और सुरक्षा चिंताओं के लिए स्थानीय विरोध लंबे समय से सरकार के लिए एक कांटा रहा है।

मगेशिमा एयरबेस जापान के लिए महत्वपूर्ण क्यों
लेकिन, एक निर्जन द्वीप भी चुनौतियों से मुक्त नहीं है। परियोजना में शुरू से ही रसद संबंधी बाधाएं आ रही हैं। निर्माण के पहले चरण में दो रनवे, मजबूत एयरक्राफ्ट शेल्टर, बंदरगाह फैसिलिटी, गोला-बारूद भंडारण और कर्मियों के लिए आवास की आवश्यकता है – जिनमें से सभी में देरी हुई है। जापान की व्यापक सुरक्षा रणनीति में मैगेशिमा की भूमिका की अपेक्षा की जाती है। इस बेस पर अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू जेट और ऑस्प्रे परिवहन विमान तैनात किए जाने की संभावना है, हालांकि स्थायी तैनाती की संभावना नहीं है। हवाई खोज और बचाव यूनिटों के भी द्वीप पर प्रशिक्षण लेने की उम्मीद है।

चीन के लिए खुशी का बात क्यों
जापान के इस एयरबेस के निर्माण में हो रही देरी से चीन की लॉटरी लग गई है। पहले ऐसी आशंका थी कि चीन के ताइवान पर हमले के वक्त जापान और अमेरिका इस द्वीप के जरिए जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। इनमें सीधे युद्ध में शामिल न होकर चीन पर दबाव बढ़ाने की योजना शामिल है। अब इस एयरबेस का काम देरी से चल रहा है, ऐसे में चीन के ताइवान आक्रमण पर उसे अमेरिका और जापान के ज्यादा प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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