बीजापुर:
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए 31 नक्सलियों में से पांच की पहचान हो गई है। इनकी पहचान खूंखार कैडर के रूप में की गई है, जिन पर कुल 25 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ स्थल से 24 हथियार और भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किए गए हैं। बता दें कि बीजापुर के मद्देड़ और फरसेगढ़ थाना क्षेत्र की सीमा पर सुरक्षाबलों ने रविवार को एक पहाड़ी पर हुई भीषण मुठभेड़ में 11 महिलाओं सहित 31 नक्सलियों मारे गए थे। हमले में दो जवान भी शहीद हो गए थे।
अधिकारियों ने बताया कि बीजापुर के फरसेगढ़-मद्देड़ थाना क्षेत्र में तेलंगाना राज्य समिति के स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य बंडी प्रकाश, भास्कर तथा नेशनल पार्क एरिया कमेटी के माओवादियों की उपस्थिति की सूचना पर सात फरवरी को राज्य पुलिस की इकाइयों जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और बस्तर फाइटर्स के जवानों को अभियान में रवाना किया गया था।
मारे गए नक्सलियों के सिर पर था इनाम
बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि मारे गए 31 माओवादियों में से पांच की पहचान कर ली गई है और शेष की पहचान की कोशिश की जा रही है। मुठभेड़ में मारे गए जिन पांच नक्सलियों की पहचान की गई है उनमें डिवीजन कमेटी सदस्य हुंगा कर्मा, प्लाटून कमांडर मंगु हेमला, एरिया कमेटी सदस्य सुभाष ओयाम, सन्नू और पार्टी सदस्य रमेश शमिल है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि नक्सली कर्मा के सिर पर आठ लाख रुपये, हेमला, सुभाष और सन्नू के सर पर पांच-पांच लाख रुपये तथा नक्सली रमेश के सिर पर दो लाख रुपये का इनाम था।
घटना स्थल पर मिले थे हथियार
उन्होंने बताया कि मुठभेड़ स्थल से एक एके-47 राइफल, उसकी तीन मैगजीन, एक सेल्फ लोडिंग राइफल (एसएलआर), उसकी दो मैगजीन, एक इंसास राइफल, उसकी एक मैगजीन, एक .303 राइफल, उसकी एक मैगजीन, एक 315 बोर राइफल, उसके 30 जिंदा कारतूस, आठ 12 बोर बंदूक, एक रॉकेट लांचर, उसके चार गोले, छह बैरल ग्रेनेड लांचर (बीजीएल), उसके 14 गोले और चार मज़ल लोडिंग राइफल, नौ बारूदी सुरंग, विस्फोटकों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, लेजर प्रिंटर, माओवादी वर्दी, साहित्य और दवाएं बरामद की गई हैं।
परिणाम भुगतने को रहें तैयार
सुंदरराज ने कहा, “अब माओवादियों के पास हिंसा छोड़ने और आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है, इसलिए अपराधियों से अपील की जाती है कि वे तुरंत हिंसक गतिविधियों को छोड़ दें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हों या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।” उन्होंने बताया कि इससे पहले मुठभेड़ में शहीद हुए दो सुरक्षाकर्मियों, डीआरजी के प्रधान आरक्षक नरेश ध्रुव और एसटीएफ के आरक्षक वासित रावटे को न्यू पुलिस लाइन स्थित शहीद वाटिका में श्रद्धांजलि दी गई।
