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Wednesday, June 3, 2026
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मैं मछली नहीं खाता… लोकसभा अध्यक्ष ने संसद में पेश किए गए आंकड़ों पर कह दी ये बात

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नई दिल्ली

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को सदन में प्रश्नकाल के दौरान बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी की एक टिप्पणी पर जवाब दिया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि मैं मछली नहीं खाता और शाकाहारी हूं। सदन में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय से संबंधित पूरक प्रश्न पूछते हुए रूडी ने कहा कि देश में 95 करोड़ लोग मछली खाते हैं और एक करोड़ लोग मछली की पैदावार और मछली पकड़ने से जुड़े हैं।

रूडी के सवाल पर बोले ओम बिरला
बीजेपी सांसद रूडी ने आगे कहा कि अध्यक्ष जी, पता नहीं आप मछली खाते हैं या नहीं। इस पर ओम बिरला ने कहा कि मैं मछली नहीं खाता। मैं शाकाहारी हूं। रूडी के पूरक प्रश्न का उत्तर मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद पिछले एक दशक में मछली की पैदावार 100 फीसदी से अधिक बढ़ गई है।

छह और भाषाओं में सदन की कार्यवाही
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा कि अब संस्कृत, उर्दू और मैथिली समेत छह और भाषाओं में सदन की कार्यवाही का भाषा रूपांतरण होगा। सदन की कार्यवाही का भाषा रूपांतरण पहले अंग्रेजी और हिंदी के अलावा 10 क्षेत्रीय भाषाओं में हो रहा था। बिरला ने कहा कि उनका प्रयास है कि मान्यताप्राप्त सभी 22 भाषाओं में सदन की कार्यवाही का रूपांतरण एक साथ हो।

बोडो, डोगरी, मैथिली, मणिपुरी, संस्कृत और उर्दू में कार्यवाही का रूपांतरण
ओम बिरला ने कहा कि मानव संसाधन की उपलब्धता होने के साथ ही यह सुनिश्चित कर दिया जाएगा। अब बोडो, डोगरी, मैथिली, मणिपुरी, संस्कृत और उर्दू में सदन की कार्यवाही का रूपांतरण होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत की संसद ही एकमात्र विधायी संस्था है जहां एकसाथ इतनी भाषाओं में कार्यवाही का रूपांतरण हो रहा है। द्रमुक सांसद दयानिधि मारन ने संस्कृत भाषा में कार्यवाही के रूपांतरण के फैसले पर आपत्ति जताई।

दयानिधि मारन ने संस्कृत पर जताई आपत्ति
दयानिधि मारन ने कहा कि सरकारी आंकड़े के मुताबिक देश में सिर्फ 73 हजार लोग संस्कृत बोलते हैं तो फिर करदाताओं के पैसे को क्यों बर्बाद किया जा रहा है। बिरला ने उनकी आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि आप किस देश में रह रहे हैं? भारत की मूल भाषा संस्कृत रही है। आपको संस्कृत पर आपत्ति क्यों हुई? हम तो सभी 22 भाषाओं में रूपांतरण की बात कर रहे हैं।

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