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शिवसैनिक से लगातार 3 बार विधायक बनने तक, कौन हैं राजन साल्वी? जिन्होंने छोड़ा उद्धव का साथ, शिंदेसेना में होंगे शामिल

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मुंबई

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद उद्धव ठाकरे गुट को कोंकण में बड़ा झटका लगा है। ठाकरे गुट के उपनेता और पूर्व विधायक राजन साल्वी एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने जा रहे हैं। राजन साल्वी ने उद्धव ठाकरे को झटका देते हुए पार्टी के उपनेता पद से इस्तीफा दे दिया है। वह कल (13 फरवरी) दोपहर 3 बजे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होंगे।

कौन हैं राजन साल्वी और कैसा है उनका राजनीतिक सफर?
दरअसल राजन साल्वी 1993-94 के आसपास शिवसेना में सक्रिय हो गए। इतना ही नहीं रत्नागिरी नगर परिषद के इतिहास में पहली बार वह शिवसेना के महापौर भी बने। इसके बाद उन्होंने शिवसेना की राजनीति में कई पदों पर कार्य किया। शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के आशीर्वाद और तत्कालीन शिवसेना नेता, पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान सांसद नारायण राणे के समर्थन से उन्होंने शिवसेना जिला प्रमुख का पद भी प्राप्त किया। जिला प्रमुख के रूप में राजन सालवी का कार्यकाल सफल रहा।

भारतीय विद्यार्थी सेना के साथ काम शुरू
राजन साल्वी ने अपना कार्य भारतीय विद्यार्थी सेना से शुरू किया। उन्होंने अब तक कई आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया है और उनका नेतृत्व किया है। उन्होंने 1995-2004 तक रत्नागिरी जिले के जिला प्रमुख के रूप में महाराष्ट्र में उत्कृष्ट कार्य किया। 2004 में शिव तीर्थ में शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने उन्हें सम्मान शील्ड देकर सम्मानित किया।

पहली बार हुई थी हार
2006 में राजापुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में उन्हें 1,600 वोटों से पराजित किया गया। हालांकि 2009 में वह राजापुर विधानसभा क्षेत्र से 25,000 वोटों के अंतर से फिर विधायक चुने गए। वह 2014 में राजापुर विधानसभा क्षेत्र से 40,000 वोटों से पुनः विधायक चुने गए। 2019 में वह लगातार तीसरी बार शिवसेना पार्टी से विधायक बने।

इस बार के चुनाव में हुई हार
राजन साल्वी को 2011 में परमाणु ऊर्जा परियोजना आंदोलन के दौरान 19 दिन जेल में बिताने पड़े थे। अब तक उनका सफर एक शिवसेना योद्धा से एक नेता बनने तक का रहा है। हालांकि वह कोंकण से वरिष्ठ शिवसेना विधायक हैं। फिर भी उन्हें अब तक मंत्री पद नहीं दिया गया है। महाराष्ट्र में राजनीतिक भूचाल के बाद शिवसेना में विभाजन हो गया और उद्धव ठाकरे ने उन्हें ठाकरे गुट का उपनेता बना दिया। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्हें शिवसेना नेता और मंत्री उदय सामंत के बड़े भाई किरण उर्फ भैया सामंत ने हराया था।

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