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मणिपुर में केंद्र ने लगाया राष्ट्रपति शासन, 4 दिन पहले ही बीरेन सिंह ने दिया था CM पद से इस्तीफा

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नई दिल्ली

मणिपुर में एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद अब राष्ट्रपति शासन लग गया है। खास बात है कि बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में नए मुख्यमंत्री का नाम सामने नहीं आया था। ऐसे में राज्य में राष्ट्रपति शासन की अटकलें लग रही थीं। राज्य में मई 2023 से अब तक दो समुदायों मैतेई और कुकी समुदाय के बीच टकराव के बाद भयंकर हिंसा हुई है। इस हिंसा में 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। माना जा रहा है कि बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद बीजेपी विधायक दल में नए सीएम के नाम पर सहमति नहीं बन पाई।

अविश्वास प्रस्ताव लाने की थी तैयारी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद बीजेपी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार चुनने में ‘विफल’ रही। बीरेन सिंह ने 4 दिन पहले ही अपने पद से इस्तीफा दिया था। खबर थी कि बीजेपी विधायक कांग्रेस की तरफ से राज्य विधानसभा में लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन कर सकते हैं। उसी दिन बीजेपी के पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा और राज्य पार्टी अध्यक्ष ए शारदा देवी ने मुख्यमंत्री पद से बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद नेतृत्व संकट के बीच इंफाल में राजभवन में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की थी।

बीरेन सिंह विधायकों के बीच समर्थन खो रहे थे?
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार बीरेन सिंह भाजपा विधायकों के बीच समर्थन खो रहे थे। इनमें से कई ने अपनी चिंताओं को व्यक्त करने के लिए दिल्ली में पार्टी नेताओं से मुलाकात की थी। इसके बावजूद, मणिपुर बीजेपी अध्यक्ष ए शारदा देवी ने किसी भी मतभेद से इनकार करते हुए कहा था कि बीरेन का इस्तीफा राज्य के भविष्य के लिए है। उन्होंने कहा था कि उनका इस्तीफा शांति की इच्छा से प्रेरित था और उन्होंने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र से निरंतर समर्थन का आह्वान किया था।

राष्ट्रपति शासन क्या है?
भारत में राष्ट्रपति शासन, जिसे केंद्रीय शासन या राज्यपाल शासन के रूप में भी जाना जाता है, राज्य सरकार के निलंबन और केंद्र सरकार की तरफ से प्रत्यक्ष शासन लागू करने को संदर्भित करता है। ऐसा तब होता है जब किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाता है। संविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार, राष्ट्रपति शासन लागू होने से राज्य सरकार के सभी कार्य केंद्र को और राज्य विधानमंडल के कार्य संसद को हस्तांतरित हो जाते हैं। केवल हाई कोर्ट्स का कामकाज अपरिवर्तित रहता है। इस अवधि के दौरान, राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख बन जाता है, और विधानसभा या तो भंग हो जाती है या स्थगित हो जाती है।

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