जयपुर
सियासत की सुर्खियों में रहने वाले मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के बारे में चर्चा है कि उन्हें कभी सत्ता का साथ रास नहीं आया। यह दावा हमारा नहीं, बल्कि किरोड़ी लाल के सियासी सफर के अब तक के आंकड़े बोलते हैं। इसको देखकर तो किरोड़ी की यहीं फितरत नजर आती है। किरोड़ी लाल इन दिनों अपनी ही सरकार के खिलाफ फोन टैपिंग के आरोप को लेकर चर्चा में है। हालांकि बीजेपी के नोटिस के बाद किरोड़ी लाल मीणा ने बैकफुट पर आकर अपनी गलती स्वीकार की है, लेकिन अब तक का किरोड़ी लाल का सियासी सफर यही कहता है कि चाहे कांग्रेस हो या खुद बीजेपी की सरकार, किरोड़ी की उनके साथ कभी नहीं पटती। अब तक सियासत में हमेशा किरोड़ी का सत्ता के खिलाफ संघर्ष देखने को मिला है।
भैरों सिंह शेखावत के समय भी किरोड़ी ने दिखाए थे तेवर
किरोड़ी लाल के संघर्ष की बात करें, तो उन्होंने हमेशा चाहे अपनी या विपक्ष की सरकार हो, अपने मुद्दों पर संघर्ष किया हैं। उनका यह अंदाज काफी पुराना है। जब दिवंगत उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत राजस्थान के मुख्यमंत्री थे, तब भी किरोड़ी लाल ने इसी तरह के तेवर दिखाए थे। सदन में इसी तरह मुद्दे उठाते रहे। उनकी भैरों सिंह शेखावत से भी मुद्दों को लेकर सामंजस्य नहीं बैठ पाया। इसके लिए काफी प्रयास भी किया गया, लेकिन किरोड़ी लाल मीणा ने अपना अंदाज नहीं बदला।
वसुंधरा राजे सरकार के दौरान भी रही किरोड़ी की अदावत
भजनलाल सरकार की तरह किरोड़ी लाल, वसुंधरा राजे सरकार में भी अपनी ही पार्टी से अदावत कर चुके हैं। इसको लेकर सियासत में यहीं चर्चा है कि किरोड़ी लाल को सत्ता का साथ रास नहीं आता है। 2003 में वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री बनी, तब भी किरोडी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया, लेकिन इसके बाद भी किरोड़ी का वसुंधरा राजे से टकराव देखने को मिला। बाद में उन्होंने बीजेपी छोड़ दी और नेशनल पीपुल्स पार्टी का हाथ थाम लिया। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ही किरोड़ी लाल मीणा से सुलह की और उनकी फिर से बीजेपी में एंट्री करवाई। इसके बाद उन्हें राजस्थान से राज्यसभा सांसद बनाकर भी भेजा गया।
गहलोत सरकार में भी किरोड़ी लाल ने नाक में दम किया
किरोड़ी लाल सड़कों पर संघर्ष करने के लिए जाने जाते हैं। पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के दौरान भी किरोड़ी लाल ने उनकी नाक में दम कर दिया था। पूरे 5 साल किरोड़ी लाल ने गहलोत सरकार को चेन से राज नहीं करने दिया। किरोड़ी ने तब भी पेपर लीक, युवाओं के रोजगार का मुद्दे, जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार, उद्योग भवन के बेसमेंट में सोना और नकदी मिलने और पुलवामा शहीदों की वीरांगनाओं के मुद्दों को लेकर गहलोत सरकार को जमकर ईंट से ईंट बजाई। इस दौरान गहलोत किरोड़ी लाल मीणा से काफी परेशान रहें। उन्होंने यहां तक कहा था कि ‘किरोड़ी लाल नॉन इश्यू को भी इूश्यू बनाने में माहिर है।’
