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Saturday, April 18, 2026
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‘नशे में कौन नहीं है मुझे बताओ जरा’, बिहार के इस शहर में खुलेआम मिल रही शराब! जब चाहें पीकर टल्ली हो जाएं

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आरा:

नशा शराब में होता तो नाचती बोतल। जी हां, पीने वाले तो कुछ ऐसा ही कहते हैं। बिहार में शराबबंदी है। लेकिन आरा के सदर अस्पताल के बेड पर पड़े इन दो भाइयों को जरा गौर से देख लीजिए। इन्होंने शहर में खुलेआम बिक रही देसी शराब का सेवन किया है। सेवन के बाद हालत खराब हो गई। किसी ने सदर अस्पताल में भर्ती करा दिया। इन्हें शरीर का होश तक नहीं है। ये आराम से शराब पीकर शहर में झूम रहे थे। इसके साथ ही बिहार में लागू शराबबंदी कानून को ठेंगा दिखा रहे थे। इन दोनों भाइयों ने जानकारी दी है कि महज 50 रुपये की शराब पी है। उस शराब में कितना जहरीला केमिकल होगा, इनके नशे से उसका अंदाजा लगा सकते हैं।

शराबबंदी कानून का मजाक
दोनों सगे भाई हैं। एक का नाम लव कुमार और दूसरे का कुश कुमार बताया जा रहा है। ये दोनों तरारी थाना क्षेत्र के कपूरडीहरा के रहने वाले रमाकांत रजवार के पुत्र हैं। घर में पिताजी नहीं थे। घर से पैसे लिए और शराब खरीद कर पी ली। उसके बाद नशे में झूमने लगे। शराब ने ऐसा असर किया कि स्थानीय लोगों ने बिगड़ती हालत देखकर इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। सवाल उठता है कि इस मामले पर कोई पदाधिकारी नहीं बोल रहा है। पुलिस के अलावा मद्य निषेध विभाग का मुंह पूरी तरह बंद हो गया है। शराब माफिया से सांठगांठ करके पूरे शहर में शराब की बिक्री कराने वाले अब चुप हैं। दोनों भाई का वीडियो देख लीजिए और अंदाजा लगाइए क्या आप उसी बिहार में हैं, जहां शराबबंदी कानून लागू है?

बिहार में शराबबंदी फेल
बिहार के कई शहरों से आए दिन शराब पीकर लोगों के टल्ली होने की खबरें आती रहती हैं। जहरीली शराब से कई बार बिहार में सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। आंकड़े बताते हैं कि शराबबंदी के बाद से बिहार में शराब की आवक कम होने का नाम नहीं ले रही है। होली से पहले बिहार के कई कस्बाई शहरों की स्थिति खराब है। स्थानीय लोगों की मानें, तो पुलिस से मिलीभगत करके शराब माफिया आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर चुके हैं। कई स्थानीय लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यदि सरकार को हिम्मत है, तो मद्य निषेध विभाग और पुलिस विभाग से जुड़े निचले और ऊपरी स्तर के अधिकारियों की संपत्ति की जांच करें।

शहरों में माफिया सक्रिय
स्थानीय लोगों के मुताबिक बिहार के किसी भी शहर में खास तरह का नेटवर्क काम करता है। मद्य निषेध विभाग के सूत्रों के मुताबिक तस्करों के पास लगातार अन्य प्रदेशों से तय समय के हिसाब से शराब पहुंचती है। लोगों का आरोप है कि इस पूरे गोरखधंधे में कुछ स्थानीय नेता के अलावा भ्रष्ट पुलिसकर्मी और थाना स्तर के कर्मी और मद्य निषेध विभाग के अधिकारी शामिल होते हैं। लोगों ने कहा कि आपको जब चाहे, जिस जगह पर चाहें शराब मिल सकती है। ये शराब यूपी और अन्य प्रदेशों से बिहार पहुंच रही है। भोजपुर जिले के एक पुलिस विभाग से जुड़े सूत्र ने कहा कि शराबबंदी के बाद से थाने में तैनात पुलिसकर्मियों की संपत्ति में 700 फीसदी से ज्यादा इजाफा हुआ है।

लगातार आ रही शराब
पुलिस से जुड़े सूत्र ने बताया कि थाने में और बॉर्डर इलाके में तैनात पुलिसकर्मी और मद्य निषेध विभाग के पुलिसकर्मियों ने 2016 के बाद से अकूत संपत्ति अर्जित की है। जानकारी के मुताबिक इनके पास इतनी संपत्ति आ गई है कि ये अन्य प्रदेशों में निवेश कर रहे हैं। सूत्र ने बताया कि बिहार सरकार को सबसे पहले शराबबंदी से जुड़े अधिकारियों की संपत्ति की जांच करनी होगी। अचानक उनकी संपत्ति में इजाफा कैसे हो गया है? सूत्र ने बताया कि पटना जैसे शहर में आने वाले शराब से भरे हुए बड़े ट्रक से 35 लाख की वसूली की जाती है। पिकअप वैन में भरी शराब 15 लाख रुपये के हिसाब से शहर में प्रवेश करती है। ये पैसा ऊपर से नीचे तक बंटता है। सूत्र ने बताया कि ऐसे ही एक मामले में कुछ साल पहले पूरा बेऊर थाना निलंबित हो गया था।

सरकार कराए जांच
इन सारे आरोपों में कितनी सच्चाई है, ये सरकार को जांच करने के बाद पता चलेगी। लेकिन इतना तय है कि बिहार में पुलिस लगातार हजारों लीटर शराब बरामद करती है, लेकिन उससे दुगनी शराब दोबारा बिहार में आती है। बिहार के किसी भी जिले में आधी रात को भी शराब डिलीवरी करने वाले कैरियर खड़े हो गए हैं। ग्रामीण इलाकों में सूखे नशे की बाढ़ सी आ गई है। शराबबंदी के बाद इसके वैकल्पिक नशे को लोग अपना रहे हैं। सीमांचल के नेपाल से सटे जिलों में लगातार ड्रग्स आ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बिहार के हर शहर में शराब माफिया की एक अपनी हुकूमत शुरू हो गई है। सूत्र ने बताया कि शराब माफिया इतने मजबूत हो गए हैं कि इन्हें अब चाह कर भी सरकार रोक नहीं पाएगी।

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