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अब्बास अंसारी की विधायकी खत्म, बीजेपी प्रवक्ता ने कसा तंज, ‘जो बोया पेड़ बबूल का..तो आम कहां से होय’

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लखनऊ

उत्तर प्रदेश के मऊ विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे अब्बास अंसारी की विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है। अब्बास अंसारी को एक मामले में दोषी पाए जाने के बाद जन्हें दो साल की सजा सुनाई गई। जिसके बाद यह कार्रवाई हुई। वहीं मुख्तार अंसारी के बेटे को सजा सुनाए जाने और विधायकी जाने पर बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने हमला बोला। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि अब्बास अंसारी को अपने कर्मों के फल के सजा के रूप में ये मिला है। ऐसे आपराधिक चरित्र के लोग लोकतंत्र के मंदिर में नहीं होने चाहिए।

दरअसल रविवार को विधान सभा सचिवालय ने अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि अब्बास अंसारी की सदस्यता समाप्त मानी जाएगी और मऊ विधानसभा सीट 31 मई 2025 से रिक्त हो गई। अब सीट रिक्त होने पर 6 महीने में उपचुनाव कराना होगा। अब्बास अंसारी की सजा पर बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि जो बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय। जब अब्बास अंसारी गुंडई और धमकी की भाषा का प्रयोग करेंगे, तो निश्चित रूप से सजा भुगतनी पड़ेगी।

राकेश त्रिपाठी ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत दो साल या उससे ज्यादा सालों की सजा सुनाई जाती है तो उसी समय से उनकी विधायकी या संसदीय समाप्त मानी जाएगी। ऐसे लोगों का सदन में आना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होता है जो गुंडई और धमकीबाजी का इस्तेमाल करते हैं।

बता दें, सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी मऊ की सदर सीट से पहली बार 2022 विधानसभा चुनाव में विधायक चुने गए थे और वे माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि निर्वाचन आयोग इस रिक्त सीट पर उपचुनाव की घोषणा कब करता है और क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियां किस दिशा में जाती हैं।

इस घटनाक्रम से पूर्वांचल की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है। मऊ जैसी संवेदनशील और राजनीतिक रूप से सक्रिय सीट पर उपचुनाव बीजेपी के लिए गठबंधन प्रबंधन की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अनुप्रिया पटेल की अपना दल और संजय निषाद की निषाद पार्टी जैसी सहयोगी पार्टियां पहले ही अधिक सीटों की मांग कर रही हैं। वहीं समाजवादी पार्टी के सामने छवि सुधार और प्रत्याशी चयन की बड़ी जिम्मेदारी होगी। अब्बास अंसारी का विवादास्पद बयान और उनके पिता मुख्तार अंसारी की पृष्ठभूमि पहले ही पार्टी की छवि पर असर डाल चुके हैं।

इस बयान पर हुई सजा
बताते चले कि अब्बास अंसारी ने 3 मार्च, 2022 की रात पहाड़पुर इलाके में एक जनसभा के मंच से अधिकारियों को धमकाते हुए बयान दिया था। अब्बास अंसारी ने कहा था “सपा के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद अधिकारियों को तबादले से पहले पिछली सरकार के अपने काम का हिसाब-किताब देना होगा।” इसके बाद मऊ कोतवाली में उनके खिलाफ धारा 153A और 120B के तहत मामला दर्ज हुआ।

अब्बास अंसारी की विधायकी समाप्ति एक तरफ़ जहां कानून के राज की पुष्टि करती है, वहीं यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों और गठबंधन की नई चुनौतियों की शुरुआत भी हो सकती है। अब देखना यह होगा कि मऊ उपचुनाव में कौन सी पार्टी बाजी मारती है।

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