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Tuesday, May 5, 2026
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पश्चिम ओडिशा के विभिन्न सांस्कृतिक समूहों ने अपनी कला का किया प्रदर्शन— संबलुरी परिवार के तत्वावधान में 12वां नुआखाई भेटघाट कार्यक्रम का आयोजन

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भेल भोपाल।

भोपाल के संबलुरी परिवार की ओर से 12वां नुआखाई भेटघाट कार्यक्रम आयोजित किया गया है। भोपाल में रहने वाले प्रवासियों ने योगदान दिया, इस कार्यक्रम में पश्चिम ओडिशा के लगभग 40 कलाकारों ने भाग लिया और अपनी कला का प्रदर्शन किया। प्रारंभ में, विभुती भूए की पूजा इस्टदेवी मां समलेश्वरी की विधि के अनुसार की गई। सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत दिलेश्वर विश्वाल के समलेश्वरी भजन से हुई. सुंदरगढ़ ओडिशा से आए हुए सरस्वती कला केंद्र सांस्कृतिक दल ने भोपाल में रहने वाले पश्चिमी ओडिशा की प्रवासी आबादी की धुनों पर नृत्य किया।

इसके साथ ही पश्चिम ओडिशा के विभिन्न सांस्कृतिक समूहों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया. जहां पश्चिमी ओडिशा की प्रवासी महिलाओं के संबलपुरी एवं सादरी नृत्य प्रदर्शन मनमोहक था, वह कार्यक्रम सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में पीके दास, उमाकांत पांडा, पीके विश्वास, आरके बारिक, सोमनाथ साहू, सुबोध साहू प्रमुख अतिथि के रूप में शामिल हुए और पारंपरिक सांस्कृतिक पत्रिका कंहर’ के 8वें संस्करण का उन्मोचन किया।

चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु डॉ बासंती गुरु तथा स्पोर्ट्स में बेहतरीन प्रदर्शन हेतु शेखर धारूआ को संबलपुरी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। बरगढ़ ओडिशा के  किशोर मिश्रा द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक भोजन परोसा। इसमें लेथा, काकरा, रसबारा कोर्डी में बने विभिन्न व्यंजनों का खूब लुत्फ उठाया। हर साल की तरह इस साल भी मां समलस्वरी की मूर्ति मंत्रमुग्ध कर देने वाली थी, जबकि डालखाई, रसरकेली, मइला जड़, भाई जूंतीया के साथ रंगारंग गीतों ने दर्शकों को पूरे दिन बांधे रखा।

यह भी पढ़िए: दादाजी धाम मंदिर में शैलपुत्री मैया का पूजन, महाराज अग्रसेन जी का मनाया जन्मोत्सव भेल भोपाल।

कार्यक्रम का संचालन डीलेश्वर विस्वाल ने किया जबकि सचिव संजीव नंदा ने स्वागत भाषण तथा वार्षिक धारा विवरण प्रस्तुत किया। तत्पश्चात अध्यक्ष भाबग्रही प्रधान ने संस्था के विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डाला। अंत में किशोर केरकेटा ने सभी को धन्यवाद दिया। इस आयोजन की सफलता में मुख्य रूप से प्रदीप माझी, रमाणी महापात्र, भवानी खमारी, दिलीप मिश्रा, बिस्वजीत माझी, सुशेंद्र मिश्रा, रमेश राणा, योगेन्द्र किशन, जीतेन्द्र त्रिपाठी, रमेश प्रधान, महेश्वर किशन आदि ने योगदान दिया।

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