भोपाल
भेल से लगे हथाईखेड़ा में करोड़ों रूपय की चार हेक्टर सरकारी जमीन बेचने का सनसनी खेज मामला सामने आया है । कुद माफियाओं ने राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से इस जमीन को बेच डाला। मामला जब प्रकाश में आया कि एक अपीलकर्ता ने इसे न्यायालय में दाखिल किया । संबंधित कोर्ट ने पूरी सुनवाई के बाद इस जमीन का नामांतरण रद्द करने का फैसला दिया है ।
किस तरह से माफिया करोड़ों की सरकारी जमीन को बेच रहे हैं और राजस्व अधिकारी सरंक्षण प्रदान कर रहे हैं यह सोच का विषय है । गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के हथाईखेड़ा में 4 हेक्टर सरकारी जमीन कुछ निजी लोगों का बेच दी गई है । ग्राम हथाईखेड़ा के खसरा नंबर 75,65 और 66 का है । वर्ष 1961 में नहर निर्माण के लिये इस भूमि को अधिग्रहित किया गया था । इस जमीन पर नहर और सड़क तो बन गई लेकिन राजस्व विभाग के नक्शे और रिकार्ड में इसे सरकारी भूमि में दर्ज ही नहीं किया गया ।
इसका फायदा उठाते हुये मूल भू—स्वामियों और उनके वारिसों सरकारी कब्जे वाली जमीन को कई निजी लोगों को बेच दी । टीटी नगर वृत के अनुविभागीय अधिकारी ने खसरा नंबर 75/1/1/1 रकबा 0.223 हेक्टर पर 10 से अधिक लोगों के नाम किये गये नामांतरण का शून्य कर दिया है । इस आदेश में माननीय न्यायालय ने साफ किया है कि राजस्व विभाग ने इस शासकीय भूमि का संरक्षण नहीं किया है इससे संबंधित लोगों को धोकाधड़ी का मौका मिला है ।
यह मामला सुनिल कुमार ने न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी टीटी नगर वृत में राहुल गुप्ता कार्यपालनयंत्री जल संसाधन विभाग कार्यपालनयंत्री लोक निर्माण संभाग—2 तहसीलदार गोविंदपुरा वृत,रईसा बेगम,रिजवान,मो.फरहान,मो.मनान के खिलाफ अपील दायर की थी । जिसमें माननीय न्यायालय ने आदेश पारित करते हुये स्थल पर शासकीय भूमि तथा अपीलार्थी की भूमि का सामांकन कर सिंचाई विभाग की भूमि पर सिंचाई विभाग से स्थाई सीमा चिन्ह स्थापित करने को कहा है । साथ ही न्यायालय ने सरकारी जमीन पर 10 से अधिक लोगों के नाम के नामांतरण निरस्त कर दिये हैं । न्यायालय ने गंभीर टिप्पणी करते हुये शासकीय भूमि के प्रति धोकाधड़ी भी बताया है ।
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