भोपाल
मध्य प्रदेश पुलिस अब आधुनिक तकनीक के साथ कदमताल करने जा रही है। पुलिस कम्युनिकेशन विभाग अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को ड्रोन उड़ाने का विशेष प्रशिक्षण देने जा रहा है, ताकि प्रदेश की कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और निगरानी कार्यों को अधिक सुरक्षित व प्रभावी बनाया जा सके। इंदौर बनेगा प्रदेश का पहला रिमोट पायलट ट्रेनिंग सेंटर इंदौर स्थित पुलिस रेडियो ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट राज्य पुलिस का पहला ‘रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन’ बनेगा। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से प्रमाणित संस्था के रूप में यहाँ एक बैच में 20 ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षित किया जाएगा। ड्रोन संचालन का यह व्यापक कोर्स 2 से 3 सप्ताह का होगा।
इसकी अनुमानित लागत प्रति प्रशिक्षु 20 से 30 हजार रुपये होगी, हालांकि पुलिसकर्मियों और आपदा प्रबंधन से जुड़े सरकारी अधिकारियों के लिए यह प्रशिक्षण नि:शुल्क रहेगा। तकनीकी क्षमता: प्रशिक्षित कर्मी 100 किलोमीटर तक की दूरी और छह घंटे से अधिक की उड़ान क्षमता वाले ड्रोन संचालित कर सकेंगे। ड्रोन तकनीक का उपयोग संवेदनशील गतिविधियों पर नजर रखने, रणनीति बनाने और वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में किया जाएगा।
भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी इस पहल का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल की तकनीकी दक्षता बढ़ाना और सुरक्षा जोखिमों को कम करना है। प्रशिक्षण डीजीसीए के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगा, जिसमें विभिन्न प्रकार के ड्रोन पर प्रायोगिक प्रशिक्षण, उद्योग से जुड़ाव और प्लेसमेंट सहयोग भी शामिल है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल पुलिसिंग बेहतर होगी, बल्कि कृषि, आपदा राहत और निगरानी जैसे क्षेत्रों में भी नई संभावनाएँ खुलेंगी। तकनीक-सक्षम और भविष्य के लिए तैयार एक आधुनिक पुलिस बल तैयार करना, जो नवाचार को बढ़ावा दे सके।
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