भोपाल
मध्य प्रदेश सरकार ने देशभक्ति की भावना को और प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से एक बड़ा निर्णय लिया है। अब प्रदेश के सभी स्कूलों, मदरसों और सरकारी आयोजनों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंदों का गायन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता को बढ़ावा मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेशभर के शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी समारोहों में यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
उन्होंने कहा कि जिस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों को प्रेरित किया, उसका पूर्ण गायन अब हर सरकारी कार्यक्रम का हिस्सा होगा। सरकार का मानना है कि इससे युवा पीढ़ी में अमर शहीदों के प्रति सम्मान और राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना जागृत होगी। जहाँ सरकार इसे राष्ट्रवाद से जोड़ रही है, वहीं इस फैसले पर राजनीतिक और धार्मिक विरोध भी शुरू हो गया है। आरिफ मसूद की आपत्ति: कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस निर्णय को ‘मजहबी आजादी’ पर असर डालने वाला बताया है। उनका तर्क है कि विवाद गीत के सम्मान को लेकर नहीं, बल्कि कुछ छंदों के उन धार्मिक सिद्धांतों से मेल न खाने के कारण है जो उनके समुदाय की मान्यताओं के विपरीत हैं।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का रुख: मुस्लिम समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों का मानना है कि इस पर और अधिक विचार-विमर्श की आवश्यकता है। बताया गया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड फिलहाल इस आदेश का अध्ययन कर रहा है और उसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने किया स्पष्ट स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए समान रूप से अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य बच्चों को स्वतंत्रता संग्राम के महत्व को समझाना और सामाजिक एकता को मजबूत करना है।
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