भोपाल
राजधानी के गोविंदपुर क्षेत्र स्थित पशुपतिनाथ नेपाली समाज मंदिर में आज भक्ति और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था लोकमाणी शर्मा द्वारा आयोजित रुद्री लाखबत्ती एवं व्रतबन्ध अनुष्ठान का, जिसमें हजारों की संख्या में नेपाली समाज के गणमान्य नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। शिवमय हुआ वातावरण धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत भगवान शिव के विशेष अभिषेक रुद्री से हुई। विद्वान पंडितों द्वारा शुक्ल यजुर्वेद के मंत्रोच्चार के बीच शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी और शहद की धारा अर्पित की गई। रुद्राभिषेक के माध्यम से विश्व शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की गई।
एक लाख दीपों से जगमगाया मंदिर कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘लाखबत्ती पूजा’ रही। मंदिर प्रांगण में जब प्रतीकात्मक रूप से एक लाख बत्तियाँ जलाई गईं, तो पूरा परिसर आध्यात्मिक रोशनी से सराबोर हो उठा। नेपाली समाज में इस पूजा का विशेष महत्व है, जिसे किसी बड़े संकल्प की सिद्धि या मनोकामना पूर्ण होने पर आयोजित किया जाता है। संस्कारों की दीक्षा: व्रतबन्ध इसी अवसर पर उपनयन संस्कार (व्रतबन्ध) का आयोजन भी किया गया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच बालकों को जनेऊ धारण कराया गया और उन्हें गायत्री मंत्र की दीक्षा दी गई। यह संस्कार बालक के धार्मिक और सामाजिक जीवन की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। सांस्कृतिक एकता का संगम आयोजन के दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘लघु नेपाल’ के रूप में नजर आया। पारंपरिक नेपाली वेशभूषा में सजे श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम के अंत में विशाल भंडारे (सामूहिक भोज) का आयोजन किया गया। आयोजक लोकमाणी शर्मा ने बताया,यह आयोजन केवल एक पूजा नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का एक प्रयास है। समाज के इतने बड़े वर्ग का एक साथ आना हमारी एकता का प्रतीक है।
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