भोपाल
मध्य प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर तीखी चर्चा हुई। विपक्ष (कांग्रेस) ने अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, दवाओं की कालाबाजारी और गंभीर बीमारियों के इलाज की अनुपलब्धता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इन सवालों का जवाब देते हुए उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सदन में बड़ी घोषणा की। अब नहीं जाना होगा प्रदेश के बाहर: सीएम केयर योजना स्वास्थ्य मंत्री ने घोषणा की कि सरकार जल्द ही ‘सीएम केयर योजना’ शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत हार्ट, लीवर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज अब मध्य प्रदेश में ही संभव होगा। मरीजों को इलाज के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।अंगदान से जुड़ी बीमारियों पर इस योजना के माध्यम से विशेष फोकस किया जाएगा।
मेडिकल शिक्षा और बुनियादी ढांचे में सुधार विपक्ष द्वारा डॉक्टरों की कमी के आरोपों पर मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा पिछले दो वर्षों में एमबीबीएस की सीटों में 1000 की वृद्धि हुई है। मेडिकल पीजी की सीटें 2000 से बढ़कर 2800 हो गई हैं। विभाग ने हाल ही में 58 असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती निकाली है।प्रदेश के हर लोकसभा क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज होगा; वर्तमान में 19 मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हैं। सुधर रहे हैं स्वास्थ्य मानक सदन को जानकारी दी गई कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर में सुधार हुआ है शिशु मृत्यु दर 43% से घटकर 37% पर आ गई है। मातृ मृत्यु दर में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जो 173% से घटकर 142% रह गई है। बीते एक वर्ष में लगभग 27 लाख लोगों ने टेली-मेडिसिन सेवाओं का लाभ उठाया है। आयुष्मान कार्ड पर अन्य राज्यों में आ रही दिक्कतों पर घेरा विपक्षी विधायकों ने मुद्दा उठाया कि छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट जैसे जिलों से जब मरीज नागपुर, चेन्नई या बेंगलुरु जाते हैं, तो वहां आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं मिल रहा है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार इस समस्या का संज्ञान ले रही है और इस मसले को जल्द सुलझाया जाएगा।
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