जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेशवासियों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल कर रही है। ‘विकसित राजस्थान-2047’ के विजन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘राज-ममता’ (राजस्थान मेंटल अवेयरनेस, मॉनिटरिंग एंड ट्रीटमेंट फोर ऑल) कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारी पूरी कर ली है।
इस पहल के माध्यम से अवसाद और तनाव जैसी समस्याओं का जड़ से निराकरण कर राजस्थान को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में देश का एक ‘मॉडल राज्य’ बनाया जाएगा। प्रदेशवासियों को उच्च स्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए जयपुर में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मेंटल हैल्थ’ की स्थापना की जा रही है। यह केंद्र अत्याधुनिक काउंसलिंग और टेली-मेडिसिन जैसी सुविधाओं से लैस होगा।
इसके अलावा, राज्य के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर ‘मेंटल हेल्थ केयर सेल्स’ स्थापित किए जाएंगे, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को अपने ही जिले में विशेषज्ञ परामर्श, पुनर्वास और उपचार की सुविधा सुलभ हो सकेगी। मानसिक संकट के समय त्वरित सहायता के लिए संचालित टोल-फ्री हेल्पलाइन ‘टेली-मानस’ (14416) राजस्थान में वरदान साबित हो रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 15 अप्रैल 2026 तक प्रदेश के 71 हजार से अधिक लोग इन टोल-फ्री नंबरों के जरिए विशेषज्ञों से परामर्श ले चुके हैं। जयपुर और जोधपुर में यह सेवा निरंतर संचालित की जा रही है, जिससे अवसादग्रस्त लोगों को नया जीवन मिल रहा है। ‘राज-ममता’ कार्यक्रम के तहत युवाओं में बढ़ते तनाव और आत्महत्या जैसी गंभीर प्रवृत्तियों को रोकने के लिए शिक्षण संस्थानों में विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे।
सरकार जमीनी स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य के लक्षणों की पहचान करने के लिए स्वास्थ्य मित्रों और आशा सहयोगिनियों को भी विशेष प्रशिक्षण दे रही है। इसका उद्देश्य प्रारंभिक स्तर पर ही लक्षणों की पहचान कर त्वरित उपचार सुनिश्चित करना है। इस नवाचार से राजस्थान न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में आत्मनिर्भर होगा, बल्कि एक स्वस्थ और खुशहाल समाज के निर्माण की ओर भी अग्रसर होगा।
