चंडीगढ़। पंजाब में बदलते तापमान और उमसभरी गर्मी के आगमन के साथ ही मौसमी बीमारियों का प्रकोप एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। रोज़मर्रा की बीमारियों से राहत पाने के लिए पहले से ही मरीज़ों की भारी भीड़ झेल रहे राज्य के सरकारी अस्पतालों में अब बुखार संबंधी बीमारियों, श्वसन संक्रमणों और पेट संबंधी विकारों के मामलों में एक नया उछाल देखा जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, यह मौसमी लहर हर साल चिंताजनक रूप से लौटती है और आम जनता के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।
चिकित्सकों के मुताबिक, इस मौसम में ‘एक्यूट फेब्राइल इलनेस’ के मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। यह कोई एक विशेष बीमारी नहीं है, बल्कि अचानक तेज़ बुखार के साथ उत्पन्न होने वाली एक ऐसी शारीरिक स्थिति है जिसमें कई तरह की बीमारियाँ शामिल हो सकती हैं। यूएस सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, ऐसी स्थितियाँ विभिन्न प्रकार के वायरल, बैक्टीरियल या परजीवी संक्रमणों के कारण पैदा हो सकती हैं। कई बार मरीज़ केवल तेज़ बुखार को मुख्य लक्षण के रूप में लेकर अस्पताल पहुँचते हैं, जबकि संक्रमण का मूल कारण शुरुआती अवस्था में स्पष्ट नहीं हो पाता और विस्तृत जांच की जरूरत पड़ती है। इस चुनौतीपूर्ण समय में पंजाब सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ आम लोगों के लिए एक बड़ा संबल बनकर उभरी है।
इस योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को सालाना 10 लाख रुपए तक के मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जाती है। चिकित्सक डॉ. विकास गोयल ने इस संबंध में बताया कि मुख्यमंत्री सेहत योजना मरीज़ों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है, क्योंकि इसके माध्यम से उन्हें बिना किसी आर्थिक बोझ के अस्पताल में भर्ती होने और कैशलेस उपचार कराने की सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा, “यह योजना सुनिश्चित करती है कि गरीब और मध्यम वर्गीय मरीज़ बिना अग्रिम पैसे की चिंता किए समय पर अपना इलाज प्राप्त कर सकें।”
