भोपाल। मप्र की राजधानी भोपाल से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘लाड़ली लक्ष्मी’ जैसे सरकारी दावों की पोल खोलती एक बेहद संवेदनशील और हैरान करने वाली कहानी सामने आई है। यहाँ की 13 वर्षीय होनहार सेलर (नाविक) ध्रुवी टंडन पिछले तीन सालों से वॉटर स्पोर्ट्स एकेडमी में दोबारा एंट्री पाने के लिए दर-दर भटक रही है। ध्रुवी का कसूर सिर्फ इतना था कि वह देश के लिए खेलना चाहती थी, लेकिन एकेडमी के अधिकारियों ने उसके चरित्र पर गंभीर सवाल उठाकर उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया।
रोते हुए ध्रुवी ने बताया कि साल 2022 में जब उसने 10 साल की उम्र में एडमिशन लिया था, तब सब ठीक था, लेकिन एक साल बाद ही उसके साथ पक्षपात शुरू हो गया। शिलांग प्रतियोगिता के दौरान उसे फटा हुआ सेल (Sail) दिया गया, जिससे वह रेस पूरी नहीं कर पाई। जब उसे एकेडमी से निकाला गया, तो मैडम ने उस पर लड़कों के साथ घूमने का झूठा आरोप लगाया, जिससे वह मानसिक रूप से बेहद टूट चुकी है। अब वह ‘पे एंड प्ले’ स्कीम के तहत अपने माता-पिता के खर्च पर खेलने को मजबूर है।
इंटरनेशनल मेडलिस्ट छोटी बहन भी सिस्टम का शिकार, मांगी गई घूस
सिस्टम की प्रताड़ना यहीं नहीं रुकी। ध्रुवी की छोटी बहन सिद्धि टंडन, जो रोइंग (Rowing) की बेहतरीन खिलाड़ी हैं और इंटरनेशनल व नेशनल लेवल पर कई मेडल जीत चुकी हैं, उन्हें भी राजनीति का शिकार होना पड़ा। परिवार का आरोप है कि ओमान में होने वाली 2025 ‘ऑप्टिमिस्ट एशियन चैंपियनशिप’ के लिए सिलेक्शन होने के बावजूद सिद्धि का नाम फाइनल लिस्ट से हटा दिया गया। जब पिता ने इसका कारण पूछा, तो नाम दोबारा जोड़ने के बदले अधिकारियों द्वारा 50 हजार रुपए की घूस मांगी गई।
यही नहीं, अधिकारियों ने बेटियों का हौसला तोड़ने वाले लहजे में ताना मारते हुए कहा, “बेटी खेलकर क्या कर लेगी? कौन सा मेडल आ जाएगा और कौन सी नौकरी लग जाएगी?” जबकि सिद्धि का रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है; उसने 2024 में हैदराबाद और मैसूर में 3 गोल्ड मेडल जीते, अक्टूबर 2025 ओमान इंटरनेशनल में 47वीं गर्ल्स रैंकिंग और अप्रैल 2026 मुंबई नेशनल में कांस्य पदक हासिल किया है।
