भोपाल। पद्मश्री से सम्मानित देश के विख्यात शायर डॉ. बशीर बद्र को शहर की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं ने सामूहिक रूप से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के राज सदन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में साहित्यकारों, कवियों, शायरों और संस्कृति प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर उनके साहित्यिक योगदान को याद किया। 28 मई को डॉ. बशीर बद्र के निधन के बाद साहित्य जगत में शोक की लहर व्याप्त है। इसी क्रम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत बद्र वास्ती ने की।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने डॉ. बशीर बद्र की शायरी, गजल लेखन और उर्दू साहित्य में उनके अप्रतिम योगदान को रेखांकित किया। वक्ताओं ने कहा कि उनकी रचनाएं मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, रिश्तों और जीवन के विविध रंगों को सहजता से अभिव्यक्त करती हैं, जिसके कारण वे देश-विदेश में समान रूप से लोकप्रिय रहे। श्रद्धांजलि सभा में दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय, मध्यप्रदेश लेखक संघ, वनमाली सृजन पीठ, मध्यप्रदेश लेखिका संघ, हिन्दी भवन, अभिनव कला परिषद, प्रभात साहित्य परिषद, कला मंदिर, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, वरिष्ठ नागरिक मंच और अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच सहित अनेक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान साहित्यकारों ने डॉ. बशीर बद्र की चर्चित गजलों और शेरों का पाठ कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। वक्ताओं ने बताया कि उनकी शायरी की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी रचनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मानित और संग्रहित हैं। सभा में उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत शायर को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके साहित्यिक अवदान को सदैव स्मरणीय बताया।
