भोपाल। मप्र के इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, रीवा, सतना, मुरैना, शिवपुरी, खरगोन, बड़वानी और धार समेत प्रदेश के अधिकांश जिलों में गहराए गंभीर जल संकट को लेकर सियासत गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे पर राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखा हमला बोला है। सिंघार ने मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की जनता को सरकार के लंबे-चौड़े भाषण और विज्ञापन नहीं, बल्कि पीने का साफ पानी चाहिए; वे अपने जीने का बुनियादी अधिकार मांग रहे हैं। सिंघार ने तंज कसते हुए कहा, “मोहन यादव जी अब तो जागो और प्रदेश की प्यासी जनता की प्यास बुझाओ।”
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन सरकार होने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से डराने वाली और मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहां मासूम बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर गहरे गड्ढों और कुओं में उतरकर पानी लाना पड़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने जल संकट पर एक विस्तृत बयान जारी कर कहा कि मध्य प्रदेश में आज सबसे बड़ा संकट सिर्फ भीषण गर्मी का नहीं, बल्कि पानी की अनुपलब्धता के कारण जीवन का संकट बन गया है।
विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों, बुंदेलखंड और महाकौशल अंचल से बेहद भयावह और हृदयविदारक तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहां महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे तपती धूप में कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं। सिंघार ने सरकार के बजट और दावों को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल दागा कि सरकार ने वर्ष 2024 से 2026 के बीच “जल जीवन मिशन” के लिए लगभग 25 हजार करोड़ रुपए और “ग्रामीण जल नल योजना” के लिए 490 करोड़ रुपए के भारी-भरकम बजट प्रावधान का दावा किया था, लेकिन आज जमीन पर स्थिति यह है कि जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। आखिर धरातल पर काम किए बिना ये हजारों करोड़ रुपए कहां गायब हो गए, इसका जवाब जनता मांग रही है।
