और साहब बन गये जगदीशपुर के मुखिया

भोपाल

भेल में ऐसा कहा जाता है कि ज्यादातर अफसरों को ऊॅचें ओहदे पर पहुंचने के लिए सिफारिश का सहारा लेना पड़ता है लेकिन कुछ ऐसे अफसर भी हैं जो अपने बेहतर परफार्मंेस से अपनी जगह खुद बना लेते हैं। उनमें से एक नाम भेल के अफसर विनय निगम का भी चर्चाओं में है। यूं तो यह भोपाल यूनिट के कुछ ब्लॉकों में बेहतर परफार्मेंस कर महत्वपूर्ण ट्रांसफार्मर विभाग में महाप्रबंधक बने और इस विभाग को कोविड-19 के एक माह में 65 और तीन माह में 103 करोड़ के ट्रांसफार्मर बनाकर कमाल कर दिया।  तरक्की का रास्ता चुन लिया। उन्हें महाप्रबंधक बने महज तीन साल ही हुए थे फिर भी कार्पोरेट ने उनके बेहतर परफार्मेंस के चलते उन्हें भेल की जगदीशपुर यूनिट का मुखिया बना दिया। वह महाप्रबंधक प्रमुख के रूप में काम तो करेंगे लेकिन उन्हें पॉवर ईडी के होंगे। वह 24 अगस्त को जगदीशपुर यूनिट में कार्यभार ग्रहण करेंगे। भेल के ईडी सहित वरिष्ठ अफसर और ट्रेड यूनियन नेताओं ने उन्हें इस यूनिट से भावभीनी विदाई दी। पिछले कुछ वर्षों में ट्रांसफार्मर विभाग से डीके ठाकुर और टीके बागची भी प्रमोशन पा चुके हैं वहीं हाइड्रो ग्रुप से राजीव सिंह को भी महाप्रबंधक प्रमुख बनाकर पहले विशाखापट्टनम और अब नोयडा भेजा गया है। यदि ईडी पद के प्रमोशन होते हैं तो यह अपनी काबलियत पर जगह बनाने जरूर सफल होंगे।

मामला मजदूरों के 6 घंटे वेतन का

भेल कारखाने में इन दिनों मजदूरों को 6 घंटे का वेतन दिये जाने का चर्चाओं में है। दरअसल भेल में कोरोना काल में भेल प्रबंधन ने ड्यूटी समय कम कर देने आदेश जारी कर दिये इसकेे चलते मजदूरों को 6 घंटे का वेतन ठेकेदार को दिया जा रहा है जबकि यह वेतन 8 घंटे का दिया जाना चाहिए। इसको लेकर ठेकेदार भी परेशान है। चर्चा है कि कुछ विभागों में 6 घंटे तो कुछ विभागों में 8 घंटे के काम का वेतन दिया जा रहा है। इसको लेकर क्रेन मेंटेनेंस विभाग के कुछ मजदूरों ने काम तक बंद कर दिया था। सब मिलाक र ठेकेदार भी परेशान और मजदूर भी। मजदूर 8 घंटे के वेतन के लिए आज भी अड़े हुए हैं तो दूसरी और प्रबंधन इसके लिए रास्ता खोजने में लगा हुआ है। चर्चा है कि दूसरी तिमाही में मजदूरों द्वारा बार-बार काम बंद कर देने से उत्पादन की गति कम हो सकती है। मजेदार बात तो यह है कि मजदूरों के साथ-साथ भेल के नियमित कर्मचारी भी 6 घ्ंाटे काम फुल वेतन पा रहे हैं तो दूसरी और ठेका मजदूरों के साथ 6 घंटे काम के बाद फुल वेतन देने में पक्षपात क्यों किया जा रहा है यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है। इसके लिए मजदूर भी प्रबंधन के खिलाफ रणनीति बनाने में जुटें हैं।

जल्द होंगे एजीएम से जीएम के प्रमोशन

जून 2020 में अपर महाप्रबंधक से महाप्रबंधक व अन्य अफसरों के इंटरव्यू के बाद भेल प्रशासन प्रमोशन करता रहा है लेकिन इस बार तीन माह गुजर जाने के बाद भी इंटरव्यू नहीं हो पाये। कार्पोरेट स्तर पर चर्चा है कि इस पद के लिए सितंबर या अक्टूबर में इंटरव्यू हो सकते हैं। प्रबंधन ने इसके लिए पूरी तैयारी कर रखी है। यूं भी प्रोडक् शन से जुड़े अफसरों को अपने प्रमोशन का इंतजार है। पिछली बार भी इससे जुड़े अफसर पांच साल एजीएम रहते हुए प्रमोशन से वंचित रह गये थे। कंपनी की हालत को देखते हुए नई प्रमोशन पॉलिसी में एक बार फिर काबिल अफसरों को तलाशा जायेगा। वहीं ट्रांसफर पॉलिसी से दु:खी अफसरों को खुश करने के लिए नई पॉलिसी भी बनाई जा सकती है। खबर तो यह भी है कि नई प्रमोशन पॉलिसी में ट्रांसफर पॉलिसी का फायदा भी उठा सकेंगे भेल के अफसर। ट्रांसफर पॉलिसी में कर्मचारियों को कितना फायदा मिलेगा यह तो बाद में ही पता चल पायेगा।

साहब के बंगले पर ड्यूटी बजाते हैं मजदूर

कभी भेल के हार्टिकल्चर विभाग का बजट 4-5 करोड़ हुआ करता था और अब यह बजट एक से डेढ़ करोड़ पर सिमट गया। यूं तो कंपनी की हालत ठीक नहीं है उस पर खर्चों में कटौती भी जारी है लेकिन भेल टाउनशिप का विभाग बजाये टाउनशिप को हराभरा करने अफसरों के बंगलों पर हार्टिकल्चर कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी। भेल टाउनशिप के बगीचे के देखने की फुर्सत किसी को नहीं। चर्चा तो यह भी है कि भेल के खेल मैदान में प्राइवेट संस्था गोल्फ क्लब में भी भेल के हार्टिकल्चर के कर्मचारी भेजे जा रहे हैं। ऐसे में खर्चोंे में कटौती की बात तो बेमानी होगी। एक मजदूर को 13 से 15 हजार तक वेतन दिया जा रहा है। टाउनशिप सिविल के सभी दफ्तरों में हार्टिकल्चर को अलग-अलग विभाग बना दिये हैं जबकि पहले इस विभाग का एक ही मुखिया हुआ करता था। अब तो नेता भी कहने लगे हैं कि अफसरों के बंगले की जगह भेल टाउनशिप की खूबसूरती के लिए इन हार्टिकल्चर कर्मचारियों का उपयोग करें तो ज्यादा अच्छा होगा। अब देखना यह है कि टाउनशिप के सिविल अफसर द्वारा हार्टिकल्चर के कर्मचारियों को बंगलों या गोल्फ क्लब में भेजने की जांच भेल के ईडी किस अंदाज में कराते हैं।

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