साइबर क्राइम कर सकती है जांच

भोपाल

भेल कर्मचारी और अधिकारियों के टर्म इंश्योरेंस पॉलीसी का मामला गर्मा गया है। दरअसल भेल कार्पोरेट ने इस पॉलीसी के प्रस्ताव को बड़ा ही गोपनीय रखा था लेकिन यह पॉलीसी का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है इसके बाद भेल प्रबंधन के कान खड़े हो गये हैं। इधर भेल की यूनियनें टर्म इंश्योरेंस का 1 करोड़ देने की मांग कर रहे हैं प्रबंधन कुछ और ही देने का मन बना रहा है। चर्चा है कि यह गोपनीय दस्तावेज कहां से लीक हुआ इसकी तलाश में प्रबंधन लग गया है। अब जल्द ही साइबर क्राइम सेल से जांच कराने की तैयारी कर रहा है। प्रबंधन यह जानने की कोशिश में है कि वह कौन सा अधिकारी, कर्मचारी या यूनियन नेता है जिसने इस पॉलीसी को सोशल मीडिया पर वायरल किया। इसको लेकर कुछ लोगों के चेहरे का रंग उड़ा हुआ है। यह तो तय है कि जिसने भी इस दस्तावेज को वायरल किया है उसकी खैर नहीं है।

भेल कर्मचारी की मौत को लेकर आक्रोश

भेल कर्मचारी वासुदेव कनेरे की मौत के मामले को लेकर भेल कर्मचारियों में खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है। दरअसल यह कर्मचारी ब्लॉक-2 के एचजीएम असेम्बली में काम करता था। शनिवार कीे सुबह सीने में दर्द उठा तो यह ओएचएस और वहां गिर पड़ा। कर्मचारियों को दर्द इस बात का है कि जिस एम्बूलेंस को कस्तूरबा ले जाने के लिए बुलाया गया उसमें न तो ऑक्सीजन सिलेंडर था और न ही अटेंडर। इसको लेकर सोशल मीडिया में एचएमएस, इंटक, ऐबू, केटीयू जैसी यूनियनें प्रबंधन पर लगातार आरोप पर आरोप लगा रही है। यहां तक कह डाला कि यदि अस्पताल की व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित नहीं की तो आगे विरोध जारी रहेगा। अस्पताल की वेन में ऑक्सीजन सिलेंडर न होने से कर्मचारी की मौत कस्तूरबा अस्पताल तक पहुंचते-पहुंचते हो गई।

कोरोना के शिकार मजदूर

भेल सहकारी उपभोक्ता भंडार की कोरोना काल में यह हालत हो गई है कि वह अपने मजदूर कर्मचारियों के वेतन में कटौती कर रहा है। मजेदार बात तो यह है कि कोरोना काल में जिन मजदूरों की मदद की जाना चाहिए वही कोरोना काल के शिकार मजदूरों के वेतन में 20 फीसदी कटौती भी कर दी गई है। अब यह मजदूर जाये तो जाये कहां। बड़ी बात तो यह है कि जिस उपभोक्ता भंडार में कर्मचारियों ने मजदूरों के हक की लड़ाई लडऩे वाले ट्रेड यूनियन नेता को जिताकर भेजा वे ही मजदूरों के वेतन में कटौती करने को मजबूर हैं। एक डायरेक्टर तो इस मामले को लेकर खुलकर विरोध में आ गये हैं। उनका कहना है कि इसको लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। खबर है कि अब तक 31 मजदूरों के वेतन में कटौती की गई है आगे भगवान ही मालिक है।

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