डीजीएम साहब को रास नहीं आया भेल

भोपाल

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड भेल के अधिकारी-कर्मचारी एक तो निजीकरण होने की खबर से डरे हुए है तो बची-खुची कसर कोरोना ने निकाल दी। बेचारे जाये तो जाये कहां साथ ही डीए-पर्क की कटौती की मार भी झेल रहे हैं आगे क्या होगा यह तो भगवान ही जाने। इससे परेशान भेल भोपाल यूनिट से पॉवर सेक्टर ट्रांसफर होकर गये एक उप महाप्रबंधक ने आखिरकार भेल से अलविदा कहने का साहस कर ही दिखाया। अब वह देश की एक नामी कंपनी में नौकरी करने पर फैसला ले चुके हैं। चर्चा है कि अब वह इस कंपनी में डिप्टी मैनेजर नहीं बल्कि जनरल मैनेजर कहलाएंगे। यूं भेल में तो लंबी नौकरी करते-करते 16 साल बाद डिप्टी जनरल मैनेजर बने और इधर सीधे जनरल मैनेजर बन गये। वह भी कंपनी में आवेदन करते ही। दरअसल हो यह रहा है कि उक्त डिप्टी जनरल मैनेजर लंबे समय से पारिवारिक पेरशानियां झेल रहे हैं और बार-बार शीर्ष प्रबंधन से वापस भोपाल आने की गुहार भी लगा रहे हैं। यहां कोई सुनने वाला तक नहीं। यह हालात एक इन साहब के ही नहीं है बल्कि कई ऐसे अफसर व कर्मचारी ट्रांसफर के बाद अपनी-अपनी मदर यूनिट आने की कोशिश में लगे हैं। अब तो प्रशासनिक स्तर पर यह भी कहा जाने लगा है कि कार्पोरेट को समय रहते अपने ट्रांसफर और प्रमोशन पॉलिसी में थोड़ी-बहुत रहम की गुंजाइश को भीतर करना होगा।

भेल कारखाने के स्वीचगियर के साहब को सलाम

भेल में यह कहा जाता है कि कुछ अफसर कंपनी में नौकरी करना महज एक ड्युटी ही समझते हैं लेकिन कुछ अफसर ऐसे भी होते हैं जो कंपनी के फायदे के लिए नयी-नयी राह बनाने की कोशिश में लगे ही रहते हैं। ऐसे ही स्वीचगियर के एक महाप्रबंधक का नाम चर्चाओं में है। हरिद्वार से पधारे और भोपाल यूनिट में प्रमोशन के बाद ज्वाइन किया। आते ही यदि उनके विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तारीफों के पुल बांधने से नहीं थक रहे हैं। हुआ यूं कि साहब ने लंबे समय से दबा पड़ा मटेरियल यार्ड में भारी भरकम राशि का कचरें के ढेर से कॉपर और एल्यूमिनियम निकाल कर जॉब बनाने के लिए उपयोग में लिया और आज यहां के बने जॉब कस्टमर के लिए तारीफ के काबिल बन गये। इस मटेरियल को बेहतर ढंग से अपडेट किया। यहां के कर्मी साहब से काफी खुश हैं और साहब को सलाम करते दिखाई दे रहे हैं। साहब के इस काम से कार्पोरेट प्रबंधन भी इतना खुश दिखाई दिया कि उसने कंपनी की अन्य यूनिटों के सभी स्टोरों को अपडेट करने का कह दिया वहीं भेल के मुखिया ने तो साहब से खुश होकर उन्हें वक्र्स इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट का अतिरिक्त प्रभार तक दे डाला। कहा यह जा रहा है कि कारखाने में कई जगह इस डिपार्टमेंट में भी लाखों का अनुपयोगी बताकर सामान को कचरे के ढेर में दबा रखा है। खैर सच्चाई तो तब पता चलेगी जब यहां का दबा हुआ मटेरियल भी बाहर निकलेगा।

मामला एक काम के तीन बार एक्सटेंंशन देने का

भेल भोपाल यूनिट के एक अधिकारी की जितनी तारीफ की जाये कम है। एक ठेकेदार को एक ही काम को लेट करने पर पैनाल्टी लगाने की बजाय तीन बार एक्सटेंशन देने की बात किसी के गले नहीं उतर रही है। इस मामले की शिकायत भेल की विजिलेंस को कर डाली। विजिलेंस ने भी इस शिकायत में दम देखते हुए नगर प्रशासन विभाग के एक सिविल अफसर की पेशी कर डाली। मामला भेल टाउनशिप में बाउन्ड्रीवॉल से जुड़ा हुआ है। चर्चा है कि जहां 90 लाख से बाउन्ड्रीवॉल बनना थी वहां साहब ने पुलिया बना डाली और जो काम की समय सीमा तय की गई थी उसमें देरी के बाद भी अपने लाभ शुभ के चलते अपने चहेते ठेकेदार को तीन बार एक्सटेंशन भी दे दिया। मजेदार बात तो यह है कि वह संबंधित ठेकेदार को इस हद तक चाहते हैं कि उन्होंने चौथी बार भी शीर्ष प्रबंधन से एक्सटेंशन देने की गुहार लगा डाली। तब तक यह बात शीर्ष प्रबंधन तक पहुंच चुकी थी। उसने चौथी बार एक्सटेंशन देने पर ब्रेक लगा दिया। वहीं विजिलेंस ने इस काम की सभी फाइलें अपने आफिस में तलब कर ली। अब साहब रोजाना विजिलेंस आफिस में दौड़ लगा रहे हैं। वहीं अपने आकाओं से बचाने की गुहार भी लगा डाली। चर्चा यह भी है कि भेल के वाटर सप्लाई विभाग में भी कुछ कामों को लेकर साहब का खासा दखल है। इसकी शिकायत भी एक नेता विजिलेंस में देने की तैयारी कर रहे हैं जिसमें टाउनशिप में सैनेटाइजर से स्पे्र करने का मामला प्रमुखता से लिया जा रहा है।

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