Thursday , October 29 2020

भेल में सेटिंग से चल रहा है काम

भोपाल

अब इसे सही कहे या गलत भेल के कुछ ब्लॉकों से औद्योगिक क्षेत्र में काम के लिए कुछ उद्योगों में बेहतर सामान भेजा जाता है ताकि कारखाने में निर्मित जॉब की बेहतर क्वालिटी आ सके। वहीं कुछ उद्योग इस काम में हेराफेरी कर चूना लगा रहे हैं। अब इसमें कुछ अफसरों की और चंद उद्योगपतियों की क्या सेटिंग है यह तो जांच कराने पर ही पता चलेगा। चर्चा है कि कारखाने के कुछ ब्लॉकों के हार्डवेयर ईएन 24 का महंगा मटेरियल औद्योगिक क्षेत्र में भेजा जाता है लेकिन इसमें हेराफेरी कर चंद उद्योग सस्ता आयटम भेजते हैं।

मजेदार बात तो यह है कि भेल इसकी सही टेस्ंिटग ही नहीं करता या फिर यहां टेस्ंिटग के लिए भेजा ही नहीं जाता। खबर है कि यह हार्डवेयर जब साइटों पर पहुंचता है तो कस्टमर को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कहा तो यह भी जा रहा है कि सस्ता आयटम इसलिए लगाया जा रहा है कि चंद भेल के ठेकेदारों ने इस काम को 100 रूपये घंटे पर ले रखा है जबकि यही काम पहले 300 रूपये घंटे पर होता था ऐसे में हेराफेरी जैसी बात होना तो लाजमी है लेकिन नुकसान तो भेल को ही उठाना पड़ रहा है।

एसडी प्लांट के इंचार्ज के जलवे

वैसे भी भेल प्रबंधन ने उद्योग नगरी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भगवान भरोसे छोड़ रखा है। यूं भी इससे कोई खास फायदा तो नहीं है लेकिन लाखों वेतन पाने वाले कर्मचारियों को इन प्लांटों का जिम्मा सौंप रखा है। यह कब ड्यूटी आते हैं कब नहीं आते या फिर पंच कर अपने घरों के काम को निपटाते हैं इसे देखने कोई जरूरत ही नहीं समझी जाती है। ऐसा ही एक मामाला बरखेड़ा स्थित सीवेज प्लांट का चर्चाओं में है। इस प्लांट के इंचार्ज सिर्फ ज्यादातर समय ड्यूटी से ही नदारद नहीं रहते बल्कि घर बैठे अपना पंच अपने ही कर्मचारियों या अन्य व्यक्तियों से कराते हैं। नियम तो यह भी है कि इंचार्ज साहब की मर्जी से ही शिफ्ट भी चेंज होती है। बड़ी बात तो यह भी है कि जो उनके चहेते हैं उन्हें नाईट अलाउंस मिले इस बात तो देखते हुए नाईट शिफ्ट में ड्यूटी लगा देते हैं और कुछ कर्मचारियों की स्थिति यह हैं कि उनकी शिफ्ट में परिवर्तन ही नहीं होता। फिलहाल अब महाप्रबंधक मानव संसाधन एयरकंडीशन रूम से बाहर निकलकर उद्योग नगरी के दफ्तरों को देखें और जानकारी लें तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।

और दुकान-दुकान घूम रहा है नाप तौल विभाग

भोपाल के नाप तौल विभाग के कर्मचारी अपना एक अलग ही कैम्प लगाकर तौल कांटों की जांच और सील लगाने में व्यस्त हैं। उन्हें यह नहीं मालूम की कोविड-19 के चलते विभाग ने जुलाई, अगस्त और सितंबर तक इस काम पर रोक लगा दी। इससे यह कैम्प इंद्रपुरी और अशोका गार्डन में बिना नाप तौल विभाग के इंस्पेक्टर के एक चपरासी और रिपेयर करने वाला मैकेनिक चला रहा है। मजेदार बात तो यह है कि जब इस विभाग ने दुकानदारों के लिए यह सुविधा ऑन लाईन कर दी है। फिर इसके लिए विभाग के कर्मचारी इंद्रपुरी और अशोका गार्डन की दुकान-दुकान क्यों पहुंच रहे हैं। अब तो व्यापारी भी इस बात को लेकर भ्रमित हो रहे हैं कि इसका माजरा क्या है या फिर मामला लाभ शुभ से तो नहीं जुड़ा है।

गोविंदपुरा के उद्योगों पर मास्क के लिए चालानी कार्यवाही

गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों पर पिछले तीन-चार दिन से यहां काम करने वालो पर मास्क न लगाने पर चालानी कार्यवाही जोरों पर है। अब चालान की राशि क्या होगी इसको लेकर उद्योगपतियों द्वारा सोशल मीडिया पर जो वायरल हो रहा है वह चौका देने वाला है। दरअसल सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा है कि चंद उद्योगपतियों को दस हजार रूपये चालानी कार्यवाही का भय दिखाकर दो-दो हजार की वसूली की जा रही है इससे हड़कंप मचा हुआ है। वैसे भी कोविड-19 के चलते इन उद्योगों की कमर टूटी हुई हैं। ऐसे में मास्क के नाम पर ज्यादा राशि की वसूली सबको खल रही है। सोशल मीडिया में उद्योगपतियों ने यहां तक लिख डाला कि मास्क के नाम पर वसूली करने वाले खुद ही मास्क नहीं पहने हुए हैं बल्कि डरा धमका कर उद्योगों से वसूली कर रहे हैं। यहीं नहीं उन्होंने ऐसे कर्मचारियों के फोटो और वीडियों भी वायरल कर दिये हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन पर क्या कार्यवाही करता है।

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