भेल भोपाल।
राजधानी के रायसेन रोड के पास पटेल नगर स्थित जागृत एवं दर्शनीय तीर्थ स्थल दादाजी धाम मंदिर में विजयादशमी पर्व पर जन जन के आधार जिनकी चारों दिशाओं में होती है जय जयकार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम सीता माता की विधि विधान से पंडित राजेंद्र पलिया ने यजमान श्री दादाजी गुरुदेव के बड़े पुत्र एवं श्री श्री 1008 श्री दादाजी गुरुदेव चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष शिवरतन नामदेव, मंदिर व्यवस्था समिति के सदस्य एवं भक्तों को पूरे विधि विधान से पूजन कराई गई। इस बाद में शस्त्र पूजन, दोपहर 12:00 बजे से सांईबाबा की पुण्यतिथि पर अभिषेक, पूजन, हवन आरती के पश्चात महाप्रसादी वितरण किया गया।
दशहरा या विजयादशमी का महत्व बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में होता है, क्योंकि इसी दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध कर अधर्म का अंत किया था। यह पर्व आंतरिक बुराइयों जैसे क्रोध, लोभ और अहंकार को समाप्त करने का संकल्प लेने और सद्गुणों को अपनाने का प्रतीक भी है। दशहरे के दिन दादाजी धाम मंदिर शमी पौधे का पूजन भक्तों द्वारा की गई क्योंकि ऐसा माना जाता है कि भगवान श्री राम ने रावण को हराने के बाद इस वृक्ष का पूजन किया था और पांडवों ने अपने शस्त्र इसी वृक्ष में छिपाए थे।
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इसके अलावा, अपराजिता का पौधा भी पूजनीय माना जाता है, क्योंकि इसे जीवन की बाधाओं को दूर करने और सुख-समृद्धि लाने वाला पौधे की पूजन भक्तों द्वारा की गई। उपस्थित सभी भक्तों ने पुण्य लाभ प्राप्त किया। यह जानकारी शिवरतन नामदेव अध्यक्ष, श्री श्री 1008 श्री दादाजी गुरुदेव चैरिटेबल ट्रस्ट ने दी।
