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भेल : बीस लाख के काम पर रिवर्स ऑक्सन लेकिन तीन करोड़ पर नहीं

एलजीएक्स विभाग का कारनामा : सहायक अभियंता संभाले हैं निविदाओं की कमान

भोपाल

भेल कारखाने के एलजीएक्स विभाग में चहेतों को लाभ पहुंचाने न केवल नियमों को शिथिल किया गया है बल्कि संबंधित को काम दिलाने एक मुुंबई की प्रायवेट कंपनी का अनुभव प्रमाण पत्र भी बुलवा लिया है। कारखाने में बीस लाख की निविदाओं में रिवर्स ऑक्सन आवश्यक रूप से किया जाता है लेकिन इस विभाग के एक सहायक अभियंता ने तीन करोड़ के काम में रिवर्स ऑक्सन करने की जरूरत ही नहीं समझी। इसके चलते वह आज एल-1 की श्रेणी में आकर खड़ा हो गया है। इसको लेकर सीवीओ और भेल के चेयरमेन को शिकायत की गई है।

सूत्रों के मुताबिक भेल कारखाने के एलजीएक्स विभाग में एनआईटी नंबर एलजीएक्स/आरसी/ई-00379 की निविदा में 13 पार्टियां शामिल हुई थी जिसमें से दो पार्टियों के दसतावेज पूरे न होने के कारण उन्हें इस निविदा से बाहर कर दिया गया। सूत्रों की माने तो यह निविदा में पेकिंग का काम शामिल था। खास बात यह है कि इसी विभाग के एक सहायक अभियंता ने अपने एक चहेते ठेकेदार को काम दिलाने के लिए सारे नियमों को ताक पर रख दिया। तीन करोड़ के इस काम में रिवर्स ऑक्सन का प्रावधान होने के बावजूद वह नहीं किया गया, जबकि भेल कारखाने के हर विभाग में बीस लाख रूपये की निविदाओं में रिवर्स ऑक्सन किया जाता है।

यही नहीं अपने चहेते को क्वालिफाई करने के लिए मुंबई की एक प्रायवेट कंपनी से अनुभव प्रमाण लगवाकर अपने चहेते को काम दे डाला। सूत्र बताते है कि संबंधित ने इस कंपनी में काम किया है तो अनुभव के साथ टीडीएस और वेट जमा करने की जानकारी भी निविदा में ली गई है या नहीं और रिवर्स ऑक्सन किया है या नहीं यह जांच का विषय है।

इस तीन करोड़ के काम में 13 में से 6 पार्टियों को काम मिला हैं । इस हिसाब से एल-1 से एल-6 तक आने वाली पार्टियां यह काम करेंगी। इस मामले में विभाग के एक अपर महाप्रबंधक की भी संदिग्ध भूमिका बताई जा रही है, इससे भेल को चूना लगने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि भेल के मुखिया इस मामले की खुद जांच करते हैं या सीवीओ से करवाते हैं

भेल में लाइसेंस फ ीस वृद्धि को लेकर होगा आंदोलन
भोपाल भेल की 2014 की शॉप पॉलिसी के मुताबिक प्रबंधन द्वारा बढ़ाई गई दुकानों की लाइसेंस फीस को लेकर भेल प्रबंधन व व्यापारी आमने-सामने हैं। भेल टाउनशिप के व्यापारी महासंघ ने बड़ी हुई लाइसेंस फीस कम करने की अपनी मांग को लेकर आंदोलन करने का फैसला लिया है । 1977 में दुकानों की लाइसेंस फ ीस महज 40 पैसे प्रति स्क्वायर फ ीट थी जो 2011 में बढ़कर 1.50 पैसे स्क्वायर फ ीट हो गई। प्रबंधन द्वारा 2014 की शॉप पॉलिसी के तहत लाइसेंस फीस बढ़ा देने से व्यापारी नाराज हैं। गौरतलब है कि व्यापारी संघ ने इस मामले को लेकर भारी उद्योग मंत्री और चेयरमेन से भी मुलाकात की, साथ ही इस मामले को लेकर हाईकोर्ट भी गये थे, लेकिन मामला व्यापारियों की कोई सुनवाई न होने के कारण चार साल तक यह मामला अधर में पड़ा रहा। इस कारण प्रबंधन को बड़ी हुई फीस जमा करने का फरमान जारी करना पड़ा। अब इस मामले को लेकर भेल प्रबंधन और व्यापारी आमने-सामने हैं।

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