Thursday , October 22 2020

राजनीति के चक्रव्यूह में फंसे भेल टाउनशिप के व्यापारी

संकट मोचक नहीं बन पाये भाजपा-कांग्रेस के नेता, गौर-कृष्णा से छिना व्यापारियों का मुद्दा

भोपाल

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) भोपाल यूनिट की स्थापना के बाद भेल उद्योग नगरी में दुकानों की बसाहट करने के लिए भेल प्रशासन ने यहां के दुकानदारों को लायसेंस फीस पर दुकानें आवंटित की थी। आज इन दुकानों की संख्या 1420 पहुंच गई हैं। इस दौरान भेल प्रशासन ने इन दुक ानदारों की लायसेंस फीस (किराया)में वर्ष 2014 से बढ़ौतरी कर दी है। जिसे वर्ष 2018 में नगर प्रशासन के राजस्व विभाग ने सख्ती दिखाते हुए इस बढ़े हुए किराये को वसूल करने के नोटिस जारी कर दिये है इसको लेकर व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ हैं। वह अपने राजनैतिक आकाओं की शरण में हैं। सब मिलाकर लगातार भेल के व्यापारी राजनीति के चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं। चाहे कांग्रेस हो या भाजपा के नेता यह व्यापारियों की समस्याओं को हल कराने में नाकाम साबित हुए हैं।

यही नहीं व्यापारियों की वर्षो पुरानी मांग दुकानों को अपने खर्चे पर दो मंजिला करने की आज भी ठंडे बस्ते में पड़ी है। इसको लेेकर भेल व्यापारी महासंघ संरक्षक विधायक बाबूलाल गौर व पूर्व महापौर श्रीमती कृष्णा गौर ने भी लगातार संघर्ष किया। लेकिन बाद में व्यापारियों के संगठन के दो फाड़ हो गये। सहकारिता राज्य मंत्री के संरक्षण भेल संयुक्त व्यापारी संघ का गठन किया गया। यह संगठन भी व्यापारियों की समस्याओं को लेकर प्रदर्शन करता रहा। यही नहीं कांग्रेस ने भी एक व्यापारियों का संगठन खड़ा किया वह भी नाकाम रहा। व्यापारियों की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई हैं।

इसको लेकर व्यापारी वर्ग भेल दिल्ली कार्पोरेट आफिस, केन्द्रीय मंत्री सुश्री उमा भारती, थावरचंद गेहलोत, सांसद आलोक संजर, विधायक बाबूलाल गौर, महापौर आलोक शर्मा, मप्र पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष तपन भौमिक, पूर्व महापौर श्रीमती कृष्णा गौर सहित कई बड़े नेताओं की शरण में जा चुके हैं। हाल ही में व्यापारियों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इन व्यापारियों को विवादित शॉप पॉलिसी खत्म करने का भरोसा दिलाया है।

खबर है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 सिंतबर को भेल के जम्बूरी मैदान में आयोजित आमसभा में भेल के व्यापारी इस मुद्दे को उठायेंगे। फिलहाल राजनीति हावी होने से अब यह मुद्दा श्री गौर और कृष्णा गौर के हाथ निकल गया है। इसका निराकरण कराने के लिए महापौर आलोक शर्मा और पर्यटन विक ास निगम के अध्यक्ष तपन भौमिक के हाथ में चला गया है। देखना यह है कि राजनीति के चक्रव्यूह में फंसे इन व्यापारियों के मुद्दे की इस बार जीत होती है कि नहीं ।

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