भेल भोपाल।
बीएचईई थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी का एकाउंट पर अस्थायी रूप से होल्ड लगा दिया गया है। जानकारी के अनुसार अध्यक्ष एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष के हस्ताक्षरयुक्त पत्र द्वारा बैंक संचालन में नये नाम जोड़ने और पुराने नाम हटाने का प्रयास किया गया था जो कि बैंक द्वारा अमान्य कर दिया गया है
विधि अनुसार आवश्यक कागजी कार्यवाही पूरी नहीं की गई। साथ ही सोसायटी के बायलॉज और एक्ट में वरिष्ठ उपाध्यक्ष जैसा कोई संवैधानिक पद ही नहीं है ऐसे में उपाध्यक्ष की जगह एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष द्वारा हस्ताक्षरित दस्तावेजों को मान्य न मानते हुए थ्रिफ्ट खातों पर रोक लगा दी गई। गौरतलब है कि कोई भी वित्तीय निर्णय लेने के लिए 2 तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। सूत्रों के मुताबिक विधि अनुसार आवश्यक कागजी कार्यवाही पूरी नहीं होने के कारण यह नौबत आई। गौरतलब है कि उपाध्यक्ष राजेश शुक्ला, सचिव निशा वर्मा, संचालक आशीष सोनी, संचालक राजमल बैरागी और संचालक रजनीकांत चौबे ने अध्यक्ष बसंत कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था।
जानकारी के मुताबिक पिछले पौने तीन साल से यह संस्था सुचारू रूप से संचालित हो रही थी। एक मामूली से विवाद ने इतना तूल पकडा कि सत्तापक्ष के डायरेक्टरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और विपक्ष के डायरेक्टरों को सत्ता पक्ष में मिला लिया गया। हालांकि इस विवाद को आसानी से सुलझाया जा सकता था। बिना बोर्ड आफ डायरेक्टर की बैठक में लिए गए निर्णय ही मान्य होते हैं, लेकिन इस सोसायटी में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिल रहा है कि 11 डायेक्टर एक साथ बैठकर कोई फैसला ले सके हों। जब यह मामला एसबीआई बैंक पहुंचा तो बैंक ने विवाद के चलते खातों को आंशिक होल्ड लगा दिया। ऐसे में संस्था के लेनदेन का काम ठप्प हो सकता है। सूत्रों की मानें तो थ्रिपफृट सोसायटी का खाता सीज होने के बाद बैंक की एचईटी शाखा में बैंक प्रबंधन एवं थ्रिफ्ट प्रबंधन के बीच कापफी गहमा—गहमी का माहौल रहा।
रोजाना 50 लाख का लेनदेन
थ्रिफ्ट जैसी प्रतिष्ठित संस्था में आपसी विवाद के चलते इतिहास में पहली बार इतना तूल पकड़ेगा इसकी उम्मीद भेल कर्मचारी सदस्यों को नहीं थी। इस संस्था के साढ़े चार हजार से ज्यादा भेल कर्मचारी सदस्य हैं। संस्था से ऋण लेना और राशि को जमा करना व अन्य सामान खरीदी रोजाना 50 लाख से ज्यादा की होती है। यदि बैंक ने एकाउंट में होल्ड लगाया है तो इससे सदस्यों के लेनदेन प्रभावित हो सकता है। इसको लेकर सदस्यों में भारी आक्रोष देखा जा रहा है। यह भी सही है कि यह मामला ओर भी आगे बढ़ेगा। इसलिए संस्था के मुखिया को विधि मान्य कार्य करते हुए संस्था को बदनामी से बचाना होगा।
वजह
समिति के अध्यक्ष बसंत कुमार का कहना है कि बैंक में आंशिक होल्ड का मामला जल्द ही निपटा लिया जाएगा इससे समिति को कोई खास परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा
