नेपानगर की नेपा मिल में नया अध्याय: बिना किसी आर्थिक पैकेज के शुरू हुआ कागज उत्पादन
भोपाल/नेपानगर। एशिया की पहली अखबारी कागज मिल ‘नेपा लिमिटेड’ (नेपा डे) ने अपने 71 साल के गौरवशाली इतिहास में कई उतार-चढ़ाव देखने के बाद अब एक नया इतिहास रच दिया है। मिल प्रबंधन ने बिना किसी विशेष आर्थिक पैकेज के इंतजार के, अपने पुख्ता इरादे और दृढ़ संकल्प के बल पर मशीन नंबर-1 से पुनः कागज उत्पादन की शुरुआत कर दी है। नए सीएमडी नरेश सिंह के कुशल नेतृत्व में अफसरों और कर्मचारियों ने मिलकर बंद पड़ी मिल की एक मशीन को महज तीन दिन के भीतर चालू कराया और इस अल्प अवधि में ही रिकॉर्ड 310 मीट्रिक टन अखबारी कागज का उत्पादन कर दिखाया, जिसकी पहली खेप राजधानी भोपाल भी भेज दी गई है।

इस बड़ी सफलता के बाद अब मिल प्रबंधन द्वारा बहुत जल्द मशीन नंबर-2 को भी चालू करने की कवायद तेजी से शुरू कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में 469 करोड़ रुपये की लागत से मिल का दोबारा कायाकल्प (आधुनिकीकरण) किया गया था, लेकिन इसके बावजूद पिछले चार सालों में कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं हो सकी थी। वर्ष 2024 से 2026 के बीच तीन सीएमडी बदले गए, जिनमें से अरविंद वढ़ेरा के कार्यकाल में तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक मिल में कागज उत्पादन पूरी तरह बंद रहा। पिछले कुछ समय से मिल को वित्तीय पैकेज दिलाने के नाम पर टेक्निकल ऑफिसर्स को बाबू बनाकर एडमिन ऑफिस में बैठा दिया गया था, जिससे मिल का संचालन धीरे-धीरे ठप्प हो गया।
हालांकि, हाल ही में पदभार संभालने वाले नए सीएमडी नरेश सिंह ने कड़ा फैसला लेते हुए एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों को एडमिन ऑफिस से वापस मिल में भेजा और सीमित संसाधनों व सीमित कर्मचारियों के साथ पेपर मशीन का संचालन शुरू कराया, जो मिल की टीम के अटूट संकल्प का एक सशक्त प्रमाण है। सांसद ने पूर्व में इसके लिए 150 करोड़ रुपये के पैकेज की मांग पीएम से की थी, जिस पर केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी से भी कई प्रतिनिधिमंडलों ने मुलाकात की थी। हालांकि, अब बिना पैकेज के ही मिल ने खुद के पैरों पर खड़े होने की उम्मीद जगा दी है।

खास बातें
- गुलाबी समाचार पत्र का इतिहास: नेपा मिल को वर्ष 1995 में देश में पहली बार गुलाबी समाचार पत्र (पिकं पेपर) का कागज बाजार में पेश करने का गौरव प्राप्त है, जिसका उपयोग प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों द्वारा किया जाता है।
- सालों की बंदी के बाद शुरुआत: लगभग 2015-16 से बंद पड़ी इस मिल का 469 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिकीकरण किया गया था। अब अप्रैल 2026 से इसमें पुनः उत्पादन प्रक्रिया मशीन नंबर-1 से शुरू कर दी गई है।
- रीसाइक्लिंग तकनीक: यह मिल वर्तमान में रद्दी कागज (वेस्ट पेपर) को रीसाइकिल करके उच्च गुणवत्ता वाला अखबारी कागज बना रही है।
- स्थापना: इस ऐतिहासिक मिल की स्थापना वर्ष 1947 में की गई थी और 26 अप्रैल 1956 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया था। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही मिल को केंद्र सरकार से पैकेज भी मिल सकता है, जिससे यह पूरी क्षमता से कार्य कर सकेगी।
