भोपाल
केंद्र सरकार की नीतियों, श्रम संहिताओं और निजीकरण के विरोध में आगामी 12 फरवरी 2026 को संपूर्ण देश सहित मध्य प्रदेश और भोपाल में विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इस देशव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने के उद्देश्य से ‘ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चा’ द्वारा रविवार को भोपाल में एक संभागीय सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रमिक नेताओं और कर्मचारियों ने भाग लिया।
प्रमुख मांगें: न्यूनतम वेतन ₹26,000 और पुरानी पेंशन की बहाली सम्मेलन में वक्ताओं ने चारों श्रम संहिताओं को “मजदूर विरोधी” करार देते हुए इन्हें तत्काल रद्द करने की मांग की। यूनियनों ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख चार्टर रखे हैं: न्यूनतम वेतन: न्यूनतम मासिक वेतन 26,000 रुपये सुनिश्चित किया जाए। पेंशन: न्यूनतम पेंशन 10,000 रुपये की जाए और एनपीएस को समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल हो।
नियमितीकरण: ठेका और संविदा कर्मियों को नियमित कर सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिले। निजीकरण पर रोक: भेल, बैंक, बीमा और रेलवे जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को तुरंत रोका जाए। “देश की संप्रभुता को खतरा” सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष (HMS) नेम सिंह और अन्य वक्ताओं ने कहा कि बिजली संशोधन विधेयक और मनरेगा को कमजोर करने जैसे कदम आम जनता के जीवन पर हमला हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नीतियों के जरिए देश की संप्रभुता को विदेशी ताकतों के सामने गिरवी रखा जा रहा है।
इन संगठनों ने दिया समर्थन इस आंदोलन का संयुक्त आह्वान इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, यूटीयूसी, एलपीएफ सहित बैंक, बीमा, रक्षा, रेलवे और राज्य कर्मचारी संगठनों द्वारा किया गया है। सम्मेलन में ये रहे मौजूद: अध्यक्ष मंडल में सुरेश श्रीवास्तव (इंटक), जितेंद्र सिंह (एचएमएस), एके परिहार (एटक), पीएन वर्मा (सीटू), सरिता चौहान (सेवा) सहित अन्य वरिष्ठ नेता मंच पर उपस्थित थे। वक्ता के रूप में प्रमोद प्रधान, यशवंत पुरोहित, नजीर कुरैशी और संजय मिश्रा सहित कई श्रमिक नेताओं ने 12 फरवरी के प्रदर्शन को ऐतिहासिक बनाने की अपील की।
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