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ओबीसी महासम्मेलन: बसपा को काटने की कोशिश में मुसीबत में घिरी बीजेपी!

सतना

मध्य प्रदेश का सतना वह इलाका है जहां बहुजन समाज पार्टी का सीधा प्रभाव है. बसपा की यहां क्या ताकत है इसका अंदाज इसी बात से लगता है कि 1996 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी के सुखलाल कुशवाह ने प्रदेश के दो दिग्गज नेता तिवारी कांग्रेस के अर्जुन सिंह और बीजेपी के वीरेंद्र कुमार सकलेचा को हराकर झंड़े गाड़े थे.

बसपा का इलाका
पिछले तीन दशक में बसपा विंध्य इलाके के इस गढ़ से ही मध्य प्रदेश में साढ़े छह फीसदी तक अपना वोट बैंक बढ़ा चुकी है. इस बार बसपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की खबरें हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 27 -28 सितंबर के आसपास इस इलाके में चुनावी अभियान पर आ रहे हैं. कांग्रेस-बीजेपी इस इलाके से लगी 40 सीटों पर अपना दबदबा कायम रखना चाहती है. पिछड़ा वर्ग को साधे बिना यह संभव नहीं है. इसीलिए बीजेपी का यहां पिछड़ा वर्ग महासम्मेलन हो रहा है. जिसमें हो रहे सवर्णों के विरोध ने यहां के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है. (इसे पढ़ें- शिवराज सिंह की चुनावी यात्रा में मंझे हुए नेता की तरह उभर रहीं साधना सिंह)

वोट ट्रांसफर का खतरा
बसपा की खूबी है कि वह जिसके साथ भी राजनीतिक गठबंधन करती है उसे अपना पूरा वोट ट्रांसफर भी करती है. यह वोट ट्रांसफर ही आने वाले चुनाव में भाजपा के लिए भारी चुनौती बन सकता है. इसे मद्देनजर रखकर भाजपा ने यहां पिछड़ा वर्ग के लोगों का महाकुंभ आयोजित कर दिया, लेकिन सवर्णों के विरोध ने इस पूरे आयोजन को बड़ा झटका दे दिया है.

भाजपा में दो फाड़
जातिगत राजनीति का गढ़ यह इलाका अब बीजेपी के लिए ही भारी पड़ रहा है. इस महासम्मेलन के खिलाफ सवर्णों ने मैदान पकड़ लिया है. एससी-एसटी एक्ट के नाम पर एक हुए सवर्णों ने ट्रांसपोर्टेशन को अपना हथियार बनाते हुए प्रशासन को बसें देने से इंकार कर दिया है.बताया जा रहा है कि भाजपा में ही इस मुद्दे पर दो फाड़ हो गए है. सवर्ण नेता जो बस ऑपरेटर्स भी हैं उन्होंने बसें देने से इंकार कर दिया है

भारी दबाव
इस सम्मेलन में एक लाख से ज्यादा लोगों के आने की तैयार है. सवर्ण समाज के विरोध ने माहौल में तनाव और गरमी ला दी है. सतना सांसद और इस महासम्मेलन के प्रभारी गणेशसिंह और बीजेपी संगठन से जुड़े नेताओं ने मैदान पकड़ लिया है. लगातार चर्चाओं के दौर जारी है. प्रशासनिक दबाव भी बना हुआ है. इसके चलते विरोध का माहौल कुछ थमने के संकेत मिल रहे हैं. फिर भी प्रशासन को सुरक्षा के भारी इंतजाम में अतिरिक्त बल की तैनाती करनी पड़ी है.

फायदे बताना
सूत्रों का कहना है कि शिवराज सरकार इसके पहले सागर में पिछड़ा वर्ग महासम्मेलन कर चुकी है. पूरे प्रदेश में संभागीय स्तर पर यह सम्मेलन होना है. सतना में यह पिछले महीने ही होने वाला था. लेकिन बारिश के कारण इसे रोक दिया था. दरअसल इस सम्मेलन का मकसद शिवराजसिंह सरकार की पिछड़ा वर्ग नीति का बखान और हितग्राहियों को पहुंचाए गए फायदे को बताना है.

कांग्रेस पर आरोप
इस सम्मेलन के प्रभारी सतना सांसद गणेशसिंह ने न्यूज 18 को बताया कि सम्मेलन में लोगों को आने से रोका जा रहा है. वाहन और साधन रोके जा रहे हैं. इसमें अप्रत्यक्ष तौर पर कांग्रेस शामिल है. भाजपा के लोगों का नाम लिया जा रहा है लेकिन ऐसा कोई मामला नहीं है. हमने पूरी व्यवस्था और सुरक्षा के इंतजाम किए हैं. सम्मेलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण होगा.

विरोध से डरते नहीं
पिछड़ा वर्ग आयोग के भगतसिंह कुशवाह ने न्यूज 18 को बताया कि पिछड़ा वर्ग की उन्नति के लिए काम कर रहे समाजसेवियों को रामजी महाजन, ज्योतिबा फूले सावित्री फूले के नाम पर पुरस्कार दिए जा रहे हैं. यह सम्मेलन खास तौर पर इसलिए रखा गया है.

शिवराज सरकार की योजनाएं इस वर्ग तक पहुंचे इसलिए प्रदेश के सभी जिलों में बैठकें और छोटे सम्मेलन हुए हैं. अब माहौल को देखते हुए कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए सक्रिय हो गए हैं. लेकिन पिछड़ा वर्ग आयोग इससे डरता नहीं है. हम पूरी ताकत से अपना सम्मेलन कर रहे हैं.

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